लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आरटीसी (Reducing Traffic Congestion) योजना लागू कर प्रदेश के प्रमुख शहरों में यातायात प्रबंधन को नई दिशा दी है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के नेतृत्व और अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) ए. सतीश गणेश के निर्देशन में संचालित इस योजना से पुलिस कमिश्नरेट वाले शहरों में ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री की सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध यातायात व्यवस्था की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में पहली बार गूगल आधारित रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है। प्रणाली प्रत्येक दो घंटे में ट्रैफिक की स्थिति का स्वतः विश्लेषण करती है और जहां सामान्य से अधिक समय लग रहा होता है, वहां संबंधित मार्ग को तुरंत चिन्हित कर अधिकारियों को कार्रवाई के लिए अलर्ट भेजती है।
आरटीसी योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नरेटों के 74 प्रमुख मार्गों, जिनकी कुल लंबाई करीब 710 किलोमीटर है, की लगातार निगरानी की जा रही है। मार्च से 15 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज में 44.92 प्रतिशत, गाजियाबाद में 43.15 प्रतिशत, वाराणसी में 20.75 प्रतिशत, लखनऊ में 13.67 प्रतिशत, कानपुर में 13.19 प्रतिशत, आगरा में 10.99 प्रतिशत और नोएडा में 10.10 प्रतिशत ट्रैफिक जाम में कमी दर्ज की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस योजना में केवल वाहनों की संख्या नहीं, बल्कि नागरिकों के वास्तविक यात्रा समय को आधार बनाकर ट्रैफिक का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर रूट मैपिंग, रूट मार्शल, जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती, अतिक्रमण हटाने और अन्य सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
यातायात निदेशालय का कहना है कि इस तकनीक से यात्रा समय कम होने, ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। अब इस मॉडल का विस्तार प्रदेश के अन्य शहरों और जनपदों में भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
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