स्पेन-इटली में रेड अलर्ट, बिजली संकट की आशंका
पेरिस। यूरोप इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। पिछले दो महीनों में दूसरी बार आई इस हीटवेव ने फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में हालात गंभीर कर दिए हैं। कई जगह तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है, जबकि बिजली आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
सबसे अधिक प्रभावित देशों में फ्रांस शामिल है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वहां गर्मी से जुड़ी घटनाओं में करीब 1000 अतिरिक्त मौतों का दावा किया जा रहा है। कई क्षेत्रों में रेड अलर्ट लागू है और लोगों को घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
स्पेन और इटली में रिकॉर्ड तापमान
स्पेन के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग का खतरा बढ़ गया है और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। वहीं इटली के रोम, मिलान, फ्लोरेंस और वेनिस समेत कई बड़े शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। अत्यधिक बिजली खपत के कारण कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
ब्रिटेन और जर्मनी भी गर्मी से बेहाल
ब्रिटेन में मौसम विभाग ने दुर्लभ रेड अलर्ट जारी किया है। दक्षिणी इंग्लैंड और लंदन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। वहीं जर्मनी में भी अत्यधिक गर्मी के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां सामने आई हैं।
बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ते तापमान के कारण एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे यूरोप के कई देशों के पावर ग्रिड पर भारी दबाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो कई देशों में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की स्थिति बन सकती है।
क्या है इस भीषण हीटवेव की वजह?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में इस समय ‘ओमेगा ब्लॉक’ और ‘हीट डोम’ जैसी मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनकी वजह से सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं यूरोप के ऊपर लंबे समय तक फंसी हुई हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण हीटवेव पहले की तुलना में अधिक तीव्र, लंबी और बार-बार आने लगी हैं।
सरकारों ने शुरू किए राहत उपाय
भीषण गर्मी से लोगों को बचाने के लिए कई देशों में स्कूलों का समय बदला गया है या उन्हें अस्थायी रूप से बंद किया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग सेंटर बनाए गए हैं, लोगों को पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी जा रही है। कुछ शहरों में सार्वजनिक परिवहन और बिजली व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं।
आगे भी राहत के आसार कम
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी यूरोप के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप जारी रह सकता है। यदि तापमान में जल्द कमी नहीं आई तो स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली आपूर्ति, परिवहन और अर्थव्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का गंभीर संकेत मान रहे हैं।
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