टीआईएसएस मुंबई के सहयोग से पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, व्यवहार कौशल और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग पर दिया जाएगा जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस में व्यवहार कौशल, प्रभावी संवाद और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से मंगलवार को ‘सक्षम पुलिसिंग’ (Saksham Policing) नामक पांच दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस), मुंबई के स्कूल ऑफ स्किल एजुकेशन के सहयोग से इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजीव सभरवाल के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के व्यवहार संबंधी कौशल, संवाद क्षमता और जिम्मेदार पुलिसिंग की समझ को बेहतर बनाना है। इसके तहत डीएसपी से एसपी रैंक तक के 37 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे पूरे पुलिस बल में कौशल-आधारित और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग की कार्यप्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी।
व्यवहार कौशल और प्रभावी संवाद पर विशेष जोर
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में एडीजी प्रशिक्षण डॉ. बीडी पॉलसन ने टीआईएसएस के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने पुलिसिंग में व्यवहार कौशल और प्रभावी संवाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से इन कौशलों को अधिक से अधिक पुलिसकर्मियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से लगभग चार लाख पुलिसकर्मियों तक प्रशिक्षण पहुंचाने की व्यापक योजना का भी उल्लेख किया। इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के पेशेवर व्यवहार और आम नागरिकों के साथ उनके संवाद को बेहतर बनाना है, ताकि पुलिस सेवाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाया जा सके।
पुलिस रेंज में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी
कार्यक्रम के कोर्स डायरेक्टर एवं डीआईजी प्रशिक्षण देव रंजन वर्मा ने प्रतिभागियों को विभिन्न पुलिस रेंज में संचालित व्यवहार कौशल और संवाद कौशल से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और नागरिकों के साथ संवाद की गुणवत्ता बेहतर बनाने के प्रयासों से अवगत कराया।
वहीं, टीआईएसएस मुंबई के स्कूल ऑफ स्किल एजुकेशन की डीन प्रोफेसर मधुश्री शेखर ने कौशल-आधारित क्षमता निर्माण और सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धतियों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रशिक्षण में ऐसी विधियों को अपनाने पर जोर दिया, जिनमें प्रतिभागी केवल सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों में कौशल का अभ्यास भी कर सकें।

इन विषयों पर दिया जाएगा प्रशिक्षण
पांच दिवसीय कार्यक्रम को अनुभव-आधारित, केस स्टडी और व्यावहारिक अभ्यास पर केंद्रित रखा गया है। इसका उद्देश्य मास्टर ट्रेनरों को ऐसी प्रशिक्षण तकनीकों से परिचित कराना है, जिनका इस्तेमाल वे आगे अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने में कर सकें।
कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में आत्म-जागरूकता और व्यक्तित्व विकास, अहिंसक संवाद, प्रभावी संचार, लैंगिक एवं सामाजिक संवेदनशीलता, तनाव प्रबंधन, आत्म-नियंत्रण और गैर-मौखिक संवाद शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रति जागरूकता, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद, सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता, विवाद प्रबंधन, समय प्रबंधन और निर्णय लेने की क्षमता जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
व्यावहारिक अभ्यास के बाद होगा मूल्यांकन
प्रशिक्षण के दौरान संवादात्मक और अभ्यास-आधारित तरीकों को अपनाया जाएगा। प्रतिभागियों को विभिन्न परिस्थितियों के अनुरूप अपने व्यवहार और संवाद कौशल का इस्तेमाल करने का अभ्यास कराया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
संवेदनशील और जवाबदेह पुलिसिंग की दिशा में पहल
‘सक्षम पुलिसिंग’ कार्यक्रम उत्तर प्रदेश पुलिस में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनरों का एक ऐसा समूह तैयार करने की पहल है, जो व्यवहार कौशल और प्रभावी संवाद से जुड़ी सीख को अन्य पुलिसकर्मियों तक पहुंचा सके। इसके माध्यम से पुलिस बल में संवेदनशीलता, जवाबदेही, नैतिक आचरण और नागरिक-केंद्रित कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षण के जरिए पुलिसकर्मियों को विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने, आम लोगों से प्रभावी संवाद स्थापित करने और तनावपूर्ण परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने के लिए तैयार किया जाएगा। यह पहल प्रदेश में पुलिसिंग की गुणवत्ता और पुलिस-जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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