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अहंकार का हुआ अंत, धर्म की हुई विजय: नगरा में रावण वध का भव्य एवं सजीव मंचन

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प्राचीन आदर्श रामलीला कमेटी की रामलीला में श्रीराम-रावण युद्ध का शानदार प्रस्तुतीकरण, दर्शकों ने लगाए जय श्रीराम के जयकारे

संजीव सिंह नगरा (बलिया)। विजयादशमी के पावन अवसर पर नगरा स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर के प्रांगण में प्राचीन आदर्श रामलीला कमेटी, नगरा द्वारा आयोजित रामलीला में रावण वध का भव्य एवं सजीव मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा रावण के वध का दृश्य देखकर मौजूद दर्शक भावविभोर हो उठे और पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। रावण वध को असत्य, अधर्म और अहंकार पर सत्य तथा धर्म की विजय के रूप में देखा जाता है।

अहंकार के पतन का प्रतीक

रामलीला में भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध का जीवंत मंचन प्रस्तुत किया गया। रावण वध केवल एक व्यक्ति के अंत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अहंकार, अन्याय और अधर्म के पतन का संदेश भी देता है।रावण अपार ज्ञान, अद्भुत विद्वता और असीम शक्ति का स्वामी था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। विजयादशमी पर रावण वध के साथ बुराई के प्रतीकों के अंत का प्रतीकात्मक आयोजन किया जाता है, जो समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

विजयादशमी का संदेश

विजयादशमी का पर्व हमें यह संदेश देता है कि ज्ञान कितना भी महान हो, शक्ति कितनी भी अपार हो और साम्राज्य कितना भी विशाल हो, यदि व्यक्ति में अहंकार है तो उसका पतन निश्चित है।अहंकार पर विनम्रता, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय ही सच्ची विजय है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग और सत्य के मार्ग की प्रेरणा दी जाती है।

गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस धार्मिक कार्यक्रम में अमर बहादुर सिंह (पत्रकार एवं महाराणा प्रताप CSC संचालक), संजीव सिंह (पत्रकार), प्रो. समरजीत बहादुर सिंह, शरद पाण्डेय (पांडेयपुर), योगेन्द्र पाण्डेय (ब्रह्माणपुरा), हीरा यादव (कोदई) सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।रामलीला के प्रमुख व्यासगण रमेश पाठक, पवन पाठक, उमेश पाठक, रवि पाठक एवं राजा पाठक हैं, जबकि कार्यक्रम के आयोजक संजय सिंह एवं रितेश चौरसिया हैं।

सांस्कृतिक परंपरा का संरक्षण

प्राचीन आदर्श रामलीला कमेटी, नगरा द्वारा आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दे रहा है। रामलीला और रावण वध के आयोजन विजयादशमी के धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व को आगे बढ़ाते हैं।

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