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हरियाणा में बिजली संकट गहराया, अनिल विज बोले- कुछ घंटों में खत्म हो सकती है हड़ताल

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118 फीडर 33 केवी और 510 से अधिक 11 केवी फीडर ठप; कई जिलों में 24 से 28 घंटे तक बिजली गुल, धारा 108 के इस्तेमाल पर सरकार तैयार

चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली आपूर्ति के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली संकट गहराता जा रहा है। कई जिलों में लंबे समय से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। इस बीच, राज्य के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करने और समाधान निकालने के लिए तैयार है। विज के मुताबिक, निजी बिजली वितरण लाइसेंस जारी करने के फैसले को लेकर विद्युत अधिनियम की धारा 108 के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा सकता है।

कई जिलों में 24 से 28 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित

जानकारी के मुताबिक, बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश में 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से अधिक फीडर ब्रेकडाउन में रहे। भिवानी में सबसे ज्यादा 280 फीडर बंद रहने की सूचना है। करनाल, भिवानी, यमुनानगर और अंबाला के कई इलाकों में 28 घंटे बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। हिसार के पॉश इलाकों में भी 24 घंटे से बिजली गुल रहने की बात सामने आई है। झज्जर में सीएजी पेट्रोल पंप भी बंद कर दिए गए।

बिजली संकट से नाराज लोगों ने गुरुवार देर रात गुरुग्राम, फरीदाबाद और सिरसा में सड़क पर उतरकर जाम लगाया और विरोध प्रदर्शन किया। हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी कई क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हो सके। बिजली आपूर्ति बाधित रहने से घरेलू कामकाज के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

धारा 108 के इस्तेमाल पर सरकार तैयार

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत के लिए तैयार है। इसमें विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई का विकल्प भी शामिल है।

मीडिया से बातचीत में विज ने कहा कि उन्होंने कर्मचारी यूनियन के नेताओं से बात की है और उन्हें शुरुआत से ही हड़ताल के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही है और कोई दूसरा समाधान सुझाए जाने पर भी उस पर चर्चा की जा सकती है।

विज के अनुसार, कर्मचारियों की ओर से निजी बिजली लाइसेंस जारी करने के फैसले को रद्द कराने के लिए धारा 108 का इस्तेमाल करने की मांग की गई थी। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से भी बातचीत की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत से जल्द समाधान निकलेगा और बिजली आपूर्ति बहाल हो सकेगी।

दोपहर तीन बजे यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक

अनिल विज ने बताया कि हड़ताल समाप्त कराने और बिजली आपूर्ति सामान्य करने के लिए शुक्रवार दोपहर तीन बजे पंचकूला रेस्ट हाउस में बिजली कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि यूनियन के नेता बैठक में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं। विज ने भरोसा जताया कि बातचीत के जरिए कुछ ही घंटों में हड़ताल खत्म हो सकती है।

ऊर्जा मंत्री ने कर्मचारियों से अपील की कि वे सरकार की ओर से बातचीत की पहल को देखते हुए हड़ताल वापस लें और बिजली आपूर्ति सुचारू करने में सहयोग करें।

क्या है विद्युत अधिनियम की धारा 108?

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत राज्य सरकार को राज्य विद्युत नियामक आयोग को जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर लिखित निर्देश देने का अधिकार है। आयोग अपने कार्यों का निर्वहन करते समय ऐसे मामलों में राज्य सरकार के निर्देशों से निर्देशित होता है। यदि यह सवाल उठता है कि कोई निर्देश जनहित से जुड़े नीतिगत मामले के अंतर्गत आता है या नहीं, तो इस संबंध में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होता है।

हालांकि, नियामक आयोग को अधिनियम के दायरे में स्वतंत्र रूप से अपने वैधानिक कार्य करने होते हैं। इसलिए धारा 108 का इस्तेमाल किस तरह और किन सीमाओं के भीतर किया जा सकता है, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल

गौरतलब है कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की कंपनी को लाइसेंस जारी किया है। इसी फैसले के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की मांग है कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले को वापस लिया जाए। हड़ताल के कारण बिजली विभाग का कामकाज प्रभावित हुआ है और कई जिलों में आपूर्ति बाधित होने से लोग परेशान हैं।अब सबकी नजरें पंचकूला में होने वाली बैठक पर टिकी हैं। बातचीत में कोई सहमति बनती है या नहीं, इससे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की बहाली और हड़ताल के भविष्य की दिशा तय होगी।

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