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पुलिस स्मृति दिवस: देशभर के 154 शहीद पुलिसकर्मियों को नमन, यूपी के छह जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

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21 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस लाइन में होगा मुख्य आयोजन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहीदों को अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि और परिजनों को करेंगे सम्मानित; नोएडा अग्निकांड में दो और जालौन के चार पुलिसकर्मी हुए थे शहीद

लखनऊ। देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर पुलिसकर्मियों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करने के लिए 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर लखनऊ स्थित पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और उनके परिवारजनों को सम्मानित करेंगे। एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया। इनमें उत्तर प्रदेश पुलिस के छह कार्मिक भी शामिल हैं। इन शहीदों में गौतमबुद्धनगर में अग्निशमन कार्य के दौरान जान गंवाने वाले दो अग्निशमनकर्मी और जालौन जिले में तैनात चार पुलिसकर्मी शामिल हैं, जिनकी हरियाणा में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास

पुलिस स्मृति दिवस मनाने की परंपरा 21 अक्टूबर 1959 की उस ऐतिहासिक घटना से जुड़ी है, जब लद्दाख के दुर्गम, बर्फीले और निर्जन क्षेत्र में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 जवान नियमित गश्त पर निकले थे। इसी दौरान स्वचालित राइफलों और मोर्टारों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घात लगाकर उन पर अचानक हमला कर दिया।

सीमित संसाधनों और साधारण हथियारों के बावजूद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए बहादुरी से मुकाबला किया और अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उन सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने राष्ट्र और समाज की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया और वीरगति प्राप्त की।

देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

एक सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक की अवधि में देशभर में विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य संबंधित सुरक्षा सेवाओं के कुल 154 कार्मिक कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए।

जारी विवरण के अनुसार, विभिन्न राज्यों और बलों में शहीद होने वाले कार्मिकों की संख्या इस प्रकार है।

राज्य पुलिस बलों में शहीद कार्मिक:

  • आंध्र प्रदेश: 01
  • अरुणाचल प्रदेश: 01
  • असम: 06
  • बिहार: 12
  • छत्तीसगढ़: 06
  • गुजरात: 02
  • हरियाणा: 04
  • झारखंड: 03
  • कर्नाटक: 05
  • केरल: 01
  • मध्य प्रदेश: 09
  • महाराष्ट्र: 02
  • मणिपुर: 01
  • पंजाब: 02
  • राजस्थान: 05
  • तमिलनाडु: 06
  • तेलंगाना: 04
  • उत्तर प्रदेश: 06
  • उत्तराखंड: 01
  • पश्चिम बंगाल: 05
  • दिल्ली: 03
  • जम्मू-कश्मीर: 09

केंद्रीय बलों और अन्य सेवाओं में शहीद कार्मिक:

  • असम राइफल्स: 06
  • सीमा सुरक्षा बल: 25
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल: 04
  • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल: 02
  • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस: 09
  • सशस्त्र सीमा बल: 05
  • अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड: 01
  • रेलवे सुरक्षा बल: 08

इन सभी जवानों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके साहस और समर्पण को देश सदैव याद रखेगा।

नोएडा के अग्निकांड में दीवार गिरने से शहीद हुए तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव

उत्तर प्रदेश के शहीद पुलिसकर्मियों में गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की अग्निशमन सेवा के चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव शामिल हैं। दोनों ने चार अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-तृतीय क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में लगी भीषण आग बुझाने के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी।

चार अगस्त की रात 3 बजकर 28 मिनट पर ईकोटेक-तृतीय थाना क्षेत्र के उद्योग केंद्र-एक स्थित मैसर्स ईलजिन इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लॉट नंबर-28 में भीषण आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही ईकोटेक-तृतीय स्थित अग्निशमन केंद्र से अग्निशमन वाहन संख्या यूपी-16 जी-0678 को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

मौके पर पहुंची अग्निशमन टीम ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का काम शुरू कर दिया। आग अत्यधिक विकराल होने के कारण अग्निशमनकर्मी भवन के दोनों ओर से बाहरी हिस्से के माध्यम से आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान अन्य अग्निशमन केंद्रों की गाड़ियां भी पहुंच गईं और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

अग्निशमन कार्रवाई के दौरान कंपनी की दाहिनी ओर की दीवार अचानक भरभराकर बाहर की तरफ गिर गई। दीवार का मलबा अग्निशमन वाहनों संख्या यूपी-32 ईजी-3482 और यूपी-16 जी-0678 पर जा गिरा। इससे अग्निशमन कार्य में लगे चालक तीर्थपाल सिंह, फायरमैन रोहित यादव, चालक राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार और फायरमैन अमित मलबे के नीचे दब गए।

मलबे में दबे सभी कर्मचारियों को बाहर निकालकर उपचार के लिए सरकारी वाहनों और एंबुलेंस से यथार्थ अस्पताल तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसरख भेजा गया। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद अग्निशमन चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव को उपचार के दौरान मृत घोषित कर दिया। हादसे में घायल अन्य तीन अग्निशमनकर्मियों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई थी।

इस घटना में तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव ने जन-धन की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण उत्तर प्रदेश पुलिस और अग्निशमन सेवा के लिए गौरव का विषय है।

अपहरण के मामले में कार्रवाई के लिए निकले जालौन के चार पुलिसकर्मी सड़क हादसे में शहीद

उत्तर प्रदेश पुलिस के जिन छह कार्मिकों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी, उनमें जालौन जिले के उरई कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, आरक्षी अशोक कुमार और आरक्षी प्रदीप कुमार भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, पांच मई 2026 को कोतवाली उरई में मुकदमा अपराध संख्या 256/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(1) और 305 में मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा अमरीक सिंह की लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ था। शिकायत में उनके मौसेरे भाई बिजेन्दर सिंह को चार अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर ले जाने की बात कही गई थी।

अपहृत व्यक्ति की शीघ्र और सकुशल बरामदगी के उद्देश्य से उरई कोतवाली से उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, आरक्षी अशोक कुमार और आरक्षी प्रदीप कुमार को आवश्यक कार्रवाई के लिए रवाना किया गया था।

यात्रा के दौरान हरियाणा के नूंह जिले में थाना सदर तावड़ू क्षेत्र के अंतर्गत धुलावट के पास केएमपी हाईवे टोल प्लाजा के नजदीक उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी आगे चल रहे ट्रक से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में चारों पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।

चारों पुलिसकर्मी अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के उद्देश्य से सरकारी दायित्व निभाने के लिए निकले थे। इसी दौरान वे सड़क हादसे का शिकार हो गए और कर्तव्य पालन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, आरक्षी अशोक कुमार और आरक्षी प्रदीप कुमार का बलिदान पुलिस सेवा के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है।

शहीदों का त्याग भावी पीढ़ियों को देता रहेगा प्रेरणा

पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीद पुलिसकर्मियों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके साहस, संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आत्मसात करने का भी दिन है। पुलिसकर्मियों का बलिदान यह संदेश देता है कि राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के लिए कर्तव्य सर्वोपरि है।

कर्तव्य की राह में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर जवानों का त्याग देशभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। उनकी शौर्य गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को निर्भीकता, कर्तव्यपरायणता और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेंगी।

21 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शहीदों को श्रद्धांजलि देकर उनके सर्वोच्च बलिदान का स्मरण किया जाएगा। साथ ही, शहीद परिवारों को सम्मानित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी। देश और समाज इन वीर जवानों के योगदान को सदैव याद रखेगा।

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