सीजेएम कोर्ट से नहीं मिली राहत, श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर उर्फ दानिश की अर्जी खारिज; अब ऊपरी अदालत में जमानत की गुहार लगाएंगे आरोपित
लखनऊ। चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपित श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर उर्फ दानिश को अदालत से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने तीनों आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब आरोपितों के वकील ऊपरी अदालत का रुख करने की तैयारी में हैं।
अदालत में शुक्रवार को आरोपितों की ओर से जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान मामले की प्रकृति और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत का कहना था कि मामले का विचारण सत्र न्यायालय में होना है। ऐसे में सीजेएम कोर्ट के स्तर पर आरोपितों को जमानत देने का औचित्य नहीं बनता है।
नागपुर में गिरफ्तारी के बाद लखनऊ लाई गई थीं आरोपित
शिवा शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर उर्फ दानिश को नागपुर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस तीनों को लेकर लखनऊ पहुंची और हजरतगंज कोतवाली में उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम के संबंध में आरोपितों से जानकारी जुटाई।
पूछताछ के बाद तीनों आरोपितों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। अदालत में पुलिस और आरोपितों की ओर से रखे गए पक्षों को सुनने के बाद तीनों को दस दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया था।
जमानत के लिए अब ऊपरी अदालत का रुख करेंगे
शुक्रवार को जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपितों के सामने अब ऊपरी अदालत में राहत मांगने का विकल्प है। आरोपितों के वकील अब वहां जमानत अर्जी दाखिल करेंगे। हालांकि, ऊपरी अदालत में याचिका कब दाखिल की जाएगी और उस पर सुनवाई की तारीख क्या होगी, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
क्या है शिवा शर्मा हत्याकांड?
शिवा शर्मा की मौत का मामला लखनऊ के चर्चित मामलों में शामिल है। इस प्रकरण में श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर उर्फ दानिश आरोपित हैं। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार करने के बाद लखनऊ लाकर पूछताछ की थी और फिर अदालत में पेश किया था। फिलहाल, अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।गौरतलब है कि जमानत याचिका खारिज होने का अर्थ आरोपितों के दोषी साबित हो जाना नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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