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दिल दहला देने वाली घटना: दम निकलने तक डेढ़ साल के मासूम की गर्दन पर बैठी रही मां, पिता रह गया देखता

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चार महीने से चल रहा था महिला का मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज, 20 दिन पहले बड़ी बेटी पर भी किया था हमला; पति की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, पुलिस हिरासत में आरोपी

जालौन। जिस मां की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है, उसी मां पर अपने डेढ़ साल के मासूम बेटे की जान लेने का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में मंगलवार तड़के हुई इस घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। आरोप है कि महिला ने अपने छोटे बेटे को उठाकर उसके गले पर दबाव बनाया। सुबह पति की नजर पड़ी तो वह बच्चे को बचाने के लिए दौड़ा, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। घर में बच्चों की किलकारियों की जगह चीख-पुकार और मातम पसर गया। परिजनों का कहना है कि महिला पिछले कई महीनों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रही थी और उसका इलाज भी चल रहा था।

दादा के पास सो रहा था मासूम, मां उठाकर ले गई

घटना कोटरा थाना क्षेत्र के सीकरी व्यास गांव की है। यहां रहने वाले राजेश बरार मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। करीब दस वर्ष पहले उनकी शादी हमीरपुर जिले के बंगरा गांव की रहने वाली पारो (28) से हुई थी। दंपती के चार बच्चे हैं। इनमें दो बेटे ऋषभ (7) और रितिक (डेढ़ वर्ष) तथा दो बेटियां रश्मि (6) और मोहिनी (4) हैं। परिवार में राजेश के माता-पिता भी साथ रहते हैं।

परिजनों के मुताबिक, पारो पिछले कई महीनों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान थी। करीब चार महीने से ग्वालियर में उसका उपचार भी कराया जा रहा था। परिवार का कहना है कि उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता था। कभी वह गुस्से में मारपीट करने लगती थी तो कभी घर से कहीं चली जाती थी। ऐसी स्थिति में बच्चे भी उसके पास सोने से डरते थे। छोटा बेटा रितिक अधिकतर अपनी दादी शांति या दादा परमानंद के पास सोता था।

मंगलवार तड़के करीब चार बजे रितिक अपने दादा परमानंद के पास लेटा था। आरोप है कि इसी दौरान पारो उसे उठाकर अपने पास ले गई। सुबह करीब पांच बजे राजेश की नजर बच्चे पर पड़ी तो वह पत्नी को उसकी गर्दन पर बैठा देखकर घबरा गया। उसने तत्काल पत्नी को हटाकर बच्चे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक मासूम की मौत हो चुकी थी।

20 दिन पहले बेटी पर भी किया था हमला

परिजनों ने बताया कि पारो के व्यवहार को लेकर परिवार पहले से परेशान था। करीब 20 दिन पहले उसकी छह वर्षीय बेटी रश्मि घर में खेल रही थी। बच्ची के शोर मचाने पर पारो गुस्से में आ गई और उसने पास पड़ी लाठी से बेटी पर हमला कर दिया था। इस घटना में बच्ची को चोट आई थी। परिवार के मुताबिक, महिला के अचानक आक्रामक हो जाने के कारण बच्चे उससे सहमे रहते थे।

पुलिस ने हिरासत में लेकर शुरू की पूछताछ

मासूम की मौत के बाद राजेश ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही कोटरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। साक्ष्य जुटाने के लिए फील्ड यूनिट को भी बुलाया गया। पुलिस ने बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पति की तहरीर पर महिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

क्षेत्राधिकारी राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि परिजनों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पति ने पत्नी पर डेढ़ वर्षीय बेटे की गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है। उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मानसिक बीमारी में क्यों बदल जाता है व्यवहार?

मनोरोग चिकित्सक अर्चना विश्वास के अनुसार, कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में व्यक्ति के व्यवहार और भावनाओं पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। इसके पीछे गंभीर तनाव, अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर, मनोविकृति, नींद की कमी और अन्य मानसिक या शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, केवल गुस्सा या चिड़चिड़ापन किसी मानसिक बीमारी की पुष्टि नहीं करता।

प्रमुख लक्षण

  • छोटी-छोटी बातों पर अचानक गुस्सा आना।
  • व्यवहार में असामान्य बदलाव और अत्यधिक चिड़चिड़ापन।
  • परिवार के सदस्यों के साथ आक्रामक व्यवहार।
  • बिना वजह शक करना या असामान्य बातें करना।
  • नींद और खानपान में अचानक बदलाव।
  • अकेले रहने की प्रवृत्ति और सामाजिक दूरी बढ़ना।

समय पर उपचार जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, व्यवहार में अचानक बदलाव, आक्रामकता या स्वयं अथवा दूसरों की सुरक्षा को लेकर खतरे के संकेत मिलने पर मनोचिकित्सक से तत्काल परामर्श लेना चाहिए। गंभीर स्थिति में व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और बच्चों तथा अन्य परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। उचित जांच, नियमित उपचार, दवाओं और परिवार के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रबंधन संभव है।

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