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नवंबर की शुरुआत में महंगाई का झटका, कमर्शियल सिलेंडर और हवाई ईंधन महंगा

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19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम 10 रुपये बढ़े, एटीएफ भी 1.37 रुपये प्रति लीटर महंगा; घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत

नई दिल्ली। नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कारोबारियों और विमानन कंपनियों को महंगाई का झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 2,810 रुपये से बढ़कर 2,820 रुपये हो गई है। वहीं, विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के दाम भी बढ़ाए गए हैं। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी है। इससे पहले 1 अक्टूबर को 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम 62.50 रुपये बढ़ाए गए थे। सितंबर में भी कीमतों में 9.50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि हुई थी।

हालांकि जुलाई और अगस्त में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बड़ी राहत दी गई थी। जुलाई में सिलेंडर 183.50 रुपये और अगस्त में 192 रुपये सस्ता हुआ था। इससे पहले फरवरी से जून के बीच लगातार बढ़ोतरी के चलते कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल 1,373 रुपये का इजाफा हुआ था। इस दौरान कीमत 1,740.50 रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 3,113.50 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई थी।

संशोधित दरों के तहत पांच किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर के नए कनेक्शन की कीमत 1,903 रुपये तय की गई है। वहीं, इसके रिफिल के लिए 782 रुपये चुकाने होंगे।

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर बरकरार रखी गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इनकी कीमतें मई में हुई बढ़ोतरी के बाद से स्थिर बताई गई हैं।

विमानन क्षेत्र के लिए भी ईंधन महंगा हुआ है। एक नवंबर से एटीएफ की कीमत 1.37 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 138.50 रुपये कर दी गई है। इससे पहले इसकी कीमत 137.12 रुपये प्रति लीटर थी। विमान ईंधन के दामों में यह लगातार चौथे महीने की बढ़ोतरी है।

एटीएफ की कीमतों में वृद्धि का असर विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर पड़ सकता है। एयरलाइंस के कुल खर्च में विमान ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से कंपनियों के खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।

तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क और रुपये-डॉलर विनिमय दर के आधार पर एलपीजी तथा एटीएफ की कीमतों की समीक्षा करती हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट और स्थानीय करों के कारण उपभोक्ताओं को मिलने वाली वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है।

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