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पीलीभीत वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग सख्त, दो अधिकारी निलंबित करने का आदेश

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ईआरओ मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी पर कार्रवाई के निर्देश; एफआईआर में बीएनएस की धारा 198 जोड़ने और एक सप्ताह में चारों विधानसभा क्षेत्रों की जांच रिपोर्ट देने को कहा

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर आगे की जांच के लिए आयोग को भेजने को कहा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारियों को उसकी पूर्व मंजूरी के बिना बहाल नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, लखनऊ को भेजे गए पत्र में आयोग ने बताया कि पीलीभीत मतदाता सूची में अनियमितताओं के संबंध में सीईओ कार्यालय की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की जांच की गई है। रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

आयोग ने दोनों अधिकारियों और वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर निल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 198 जोड़ने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित अदालत में मामले की पैरवी गंभीरता से करने को कहा है, ताकि कानूनी प्रक्रिया अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके।

निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत जिले की सभी चार विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि जांच रिपोर्ट पत्र जारी होने के एक सप्ताह के भीतर आयोग को भेजी जाए। इसके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की स्पष्ट टिप्पणी भी शामिल करनी होगी।

इसके अलावा आयोग ने वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर निल कुमार के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की भूमिका के बारे में तीन दिन के भीतर जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

निर्वाचन आयोग ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को भी अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करने को कहा है। खास तौर पर फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े आंकड़ों की डेटा फीडिंग की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पत्र आयोग की अवर सचिव दीपमाला की ओर से जारी किया गया है। इसकी प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। आयोग के इन निर्देशों के बाद पीलीभीत मतदाता सूची से जुड़े मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

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