होम देश प्रदेश नागपुर में कांग्रेस का परचम, भाजपा उम्मीदवार को 3,271 वोटों से हराया

नागपुर में कांग्रेस का परचम, भाजपा उम्मीदवार को 3,271 वोटों से हराया

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महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर संभाग स्नातक क्षेत्र में अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की; आरएसएस के मुख्यालय वाले शहर में नतीजे से कांग्रेस को मिली मजबूती

नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर जीत हासिल की है। कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से पराजित कर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। लंबी मतगणना प्रक्रिया के बाद आए इस परिणाम को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गढ़ माना जाता है और यहां भाजपा की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी है।

इस चुनाव में जीत के साथ वंजारी ने नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत दर्ज की। परिणाम सामने आने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। कांग्रेस के लिए यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में विधान परिषद की सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजर थी।

भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत, फिर भी नहीं मिली जीत

जीत के बाद मीडिया से बातचीत में अभिजीत वंजारी ने कहा कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के बड़े नेता भी नागपुर में मौजूद थे, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस का समर्थन किया। वंजारी ने अपने पक्ष में मतदान करने वाले मतदाताओं का आभार जताया।

इस चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर है। इसके अलावा, नागपुर उस लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी करते हैं। ऐसे में भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्र में कांग्रेस की जीत को पार्टी के लिए अहम राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

आरएसएस के गढ़ में कांग्रेस की जीत पर चर्चा

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय स्थित है। संघ की इस क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत संगठनात्मक और वैचारिक उपस्थिति रही है। भाजपा की भी नागपुर और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत मानी जाती है। ऐसे क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत ने इस चुनाव को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसमें निर्धारित पात्रता वाले स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए इस नतीजे को पूरे राज्य की राजनीतिक स्थिति का सीधा संकेत मानने के बजाय संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के फैसले के रूप में देखना उचित होगा।

एमवीए के समर्थन से मैदान में थे वंजारी

अभिजीत वंजारी ने विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में कांग्रेस के साथ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं। गठबंधन के समर्थन और स्थानीय मतदाताओं के भरोसे के बीच वंजारी भाजपा प्रत्याशी को हराने में सफल रहे।

कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने भी इस जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस नतीजे से भ्रम का गुब्बारा फूट गया है और नफरत की हार हुई है। उनका बयान चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया।

विधान परिषद उपचुनावों में कांग्रेस ने खोला खाता

कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए हुए उपचुनावों के बीच नागपुर का परिणाम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा। पार्टी ने इस जीत के साथ इन चुनावों में अपना खाता खोला। नागपुर में जीत से कांग्रेस को संगठनात्मक स्तर पर उत्साह मिला है, जबकि भाजपा के लिए यह परिणाम अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली हार के कारण चर्चा का विषय बन गया है।

नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का यह मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके नतीजे को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। कांग्रेस ने इसे मतदाताओं के समर्थन की जीत बताया, जबकि अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के लिए अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों और स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

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