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एसआईआर पर चुनाव आयोग का हलफनामा, फैसलों को बताया सर्वसम्मत

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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में ईसीआई ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों को खारिज किया; मतदाता सूची पुनरीक्षण, फॉर्म-6 और सुनवाई की प्रक्रिया पर दी सफाई

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए एसआईआर के तीनों आदेश सर्वसम्मत निर्णय थे।

आयोग ने यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज और विभिन्न राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया है। याचिकाकर्ताओं में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के 13 नेता शामिल हैं। आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की ओर से संयुक्त रूप से जवाब दाखिल किया गया है।

फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र अलग दिखेंगे

ईसीआई ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म को देखकर ऐसा लग सकता था कि उसमें संशोधन किया गया है। आयोग के मुताबिक, फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसमें बदलाव करने का अधिकार सरकार के पास है। एसआईआर का घोषणा-पत्र इससे अलग है।

आयोग ने कहा कि 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग दिखाई देंगे, जैसा कि भौतिक फॉर्म में होता है। इससे दोनों दस्तावेजों के बीच अंतर स्पष्ट होगा।

मैपिंग नहीं होने पर घर जाकर जुटाए जाएंगे दस्तावेज

मतदाता सूची में मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं के संबंध में आयोग ने कहा कि उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होगा। बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, उसे ऑनलाइन कराया जाएगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ईसीआईनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में न तो जोड़ा जाता है और न ही हटाया जाता है। नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के विशेषज्ञों वाली समिति भी गठित की गई है।

गोवा के 97 मतदाताओं के मामले में दी सफाई

गोवा में छूटे 97 मतदाताओं के मामले पर आयोग ने अपने जवाब में कहा कि इनमें से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों पर आयोग ने कहा कि ये अपीलें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दायर की थीं। आयोग के मुताबिक, ये मामले उसके समक्ष नहीं रखे गए थे।

सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पर भी उठाया सवाल

निर्वाचन आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। आयोग ने मीडिया में आंतरिक दस्तावेज जारी करने के आरोपों से भी इनकार किया। उसका कहना है कि उसने कोई आंतरिक नोट या फाइल मीडिया को जारी नहीं की और न ही ऐसा करने की अनुमति दी।

हलफनामे में आयोग ने निर्णय लेने की आंतरिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उसके अनुसार, फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और उसके बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास जाती है। आयोग ने कहा कि फाइल पर लिखे नोट या सवाल को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

28 जुलाई के आदेश और ईवीएम याचिकाओं पर जवाब

हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई का आदेश अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। अगले दिन दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। इसके बाद 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ।

ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी ऐसी याचिकाओं को कई बार खारिज कर चुका है। आयोग ने बताया कि दशहरा अवकाश के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है और उसे विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने की अनुमति मांगी गई है।

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