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शिवा शर्मा केस में बड़ा खुलासा! 2200 किलोमीटर तक पुलिस को छकाती रही श्रद्धा दुबे, नेपाल से नागपुर तक बदलती रही ठिकाने

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इनाम बढ़ते ही तेज हुई तलाश, सिम कार्ड से दूरी और इंटरनेट कॉलिंग के सहारे बचने की कोशिश का दावा; यूपी एसटीएफ और नागपुर पुलिस के संयुक्त अभियान में तीनों आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ। कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मॉडल श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। लखनऊ में चौथी मंजिल से गिरकर कारोबारी की मौत के बाद शुरू हुई पुलिस की तलाश नेपाल से लेकर नागपुर तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश लगातार ठिकाने बदलते रहे। करीब 2200 किलोमीटर की आवाजाही, सिम कार्ड से दूरी, इंटरनेट कॉलिंग और टैक्सी बदलने जैसी गतिविधियों के बीच पुलिस ने आखिरकार नागपुर में तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में चौथी मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह अलीगंज के रहने वाले कारोबारी थे। अगले दिन उनकी मां रंजना शर्मा की शिकायत पर श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश, आदिल और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी।

इनाम 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया

पुलिस के मुताबिक, फरार आरोपियों पर पहले 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 18 अक्टूबर को इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई। इससे पहले 17 अक्टूबर को गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। लगातार दबिश के बावजूद आरोपियों के हाथ नहीं आने पर पुलिस की कई टीमें उनकी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी थीं।

लखनऊ से नेपाल और फिर नागपुर तक का सफर

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए कई शहरों में अपने ठिकाने बदले। उनकी आवाजाही सीतापुर, महमूदाबाद, बहराइच और रुपईडीहा होते हुए नेपाल तक बताई गई। श्रद्धा के नेपाल के बुटवल में एक होटल में ठहरने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद आरोपियों के गोरखपुर और रायबरेली की ओर जाने तथा 17 अक्टूबर को आगरा में रुकने की बात कही गई।

18 अक्टूबर को श्रद्धा के लखनऊ लौटने और विभूतिखंड में एक समाचार एजेंसी को बयान देने की भी जानकारी सामने आई। इसके बाद वह फिर निकल गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी, लेकिन उनके बार-बार ठिकाने बदलने से टीमों को कई बार खाली हाथ लौटना पड़ा।

सिम कार्ड हटाने और इंटरनेट कॉलिंग का सहारा लेने का दावा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने सामान्य मोबाइल कॉल से बचने के लिए सिम कार्ड हटाए और फेसटाइम तथा व्हाट्सऐप जैसी इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल किया। वे कथित तौर पर रिक्शा, ई-रिक्शा, टैक्सी और कैब से सफर कर रहे थे। किसी एक जगह लंबे समय तक नहीं रुकना भी उनकी रणनीति का हिस्सा बताया गया।

जांच में कानपुर से नागपुर की यात्रा के दौरान टैक्सी चालक के फोन पर इंटरनेट इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा सुराग मिलने की बात सामने आई है। इसी कड़ी को जोड़ते हुए पुलिस ने यात्रा के रास्तों और संभावित ठिकानों की पड़ताल की। बताया जाता है कि एक टैक्सी चालक से मिली जानकारी ने नागपुर में एक फ्लैट तक पहुंचने में मदद की।

यूपी एसटीएफ और नागपुर पुलिस का संयुक्त अभियान

लगातार तलाश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 20 अक्टूबर को नागपुर से श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया गया। तीनों को 21 अक्टूबर को नागपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उन्हें लखनऊ लाया गया। इसके बाद उन्हें हजरतगंज थाने ले जाया गया। आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत चिकित्सकीय परीक्षण और अदालत में पेशी की तैयारी की गई।

इस मामले में पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई। हजरतगंज के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को पुलिस लाइन भेजे जाने की जानकारी सामने आई, जबकि डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर और एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा को पद से हटाया गया।

गिरफ्तारी के बाद भी कई सवाल बरकरार

श्रद्धा दुबे ने एक साक्षात्कार में शिवा शर्मा की हत्या से इनकार किया था। उसका दावा था कि शिवा चौथी मंजिल से खुद कूदे थे। दूसरी ओर, मृतक की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसलिए मौत की परिस्थितियों और आरोपों की सच्चाई का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।

इस बीच, श्रद्धा और शिवा के बीच कथित बातचीत की कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रसारित होने की भी खबरें आईं। इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें जांच का निर्णायक सबूत मानना उचित नहीं होगा। पुलिस की ओर से इनकी फॉरेंसिक जांच कराए जाने की बात कही गई है।

करीब दो सप्ताह तक चली तलाश के बाद तीन आरोपियों की गिरफ्तारी ने मामले को नया मोड़ दिया है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि शिवा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और जांच में सामने आए साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं या नहीं। इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच और अदालत में पेश होने वाले तथ्यों से ही सामने आएंगे।

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