एससी-एसटी एक्ट, यूजीसी और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग, बोले- सवर्ण होना गुनाह नहीं
लखनऊ । सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने गुरुवार को घोरावल क्षेत्र के भरौली गांव में श्री सुरेंद्र नाथ तिवारी के आवास पर आयोजित सवर्ण समाज की बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने सामान्य वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए एससी-एसटी एक्ट में सुधार, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।
बैठक को संबोधित करते हुए सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि आज के समय में सवर्ण होना क्या गुनाह हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में सामान्य वर्ग के लोगों को जातिगत कानूनों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में हरदोई और हरियाणा समेत विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
चौबे ने हरदोई की एक कथित घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जमीन की पैमाइश के दौरान एक लेखपाल ने व्यक्ति का सरनेम पूछकर उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराने की बात कही। हालांकि उन्होंने इस घटना के संबंध में विस्तृत दस्तावेज या आधिकारिक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया।
उन्होंने हरियाणा की एक अन्य घटना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि चोरी के आरोप में पकड़े गए एक व्यक्ति ने जातिसूचक गाली दिए जाने का आरोप लगाया, जिसके बाद एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। चौबे ने इन घटनाओं को आधार बनाते हुए एक्ट के कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए और इसमें सुधार की मांग की।
चित्रकूट की घटना का किया जिक्र
सूरज प्रसाद चौबे ने अपने संबोधन में चित्रकूट के देवा द्विवेदी नामक करीब 25 वर्षीय युवक का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि युवक के खिलाफ फर्जी एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था और मानसिक परेशानी के कारण उसने आत्महत्या कर ली। चौबे ने कहा कि इस तरह के मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग के कारण बड़ी संख्या में लोग मुकदमों और जेल की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूजीसी के प्रावधानों पर भी उठाए सवाल
सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे सवर्ण समाज के बच्चों के उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यूजीसी के मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करते हुए संबंधित प्रावधानों को वापस लेना चाहिए। चौबे ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के बच्चों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
छात्रवृत्ति को लेकर सरकार से सवाल
बैठक में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दिए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। चौबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से छात्रवृत्ति को लेकर हाल में आदेश जारी किया गया है, जिसमें विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को लाभ दिए जाने की बात है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है तो उसकी मदद जाति देखकर क्यों की जाए। उनका कहना था कि गरीबी किसी जाति को देखकर नहीं आती और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के आधार पर शिक्षा के लिए सहायता मिलनी चाहिए।
भाजपा पर भी साधा निशाना
सूरज चौबे ने भारतीय जनता पार्टी पर भी सामान्य वर्ग की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा को राजनीतिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब सामान्य वर्ग से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने भाजपा के बूथ, मंडल और जिला स्तर पर काम करने वाले सामान्य वर्ग के कार्यकर्ताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो कार्यकर्ता पार्टी के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं, उन्हें भी अपने समाज से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए।
चौबे ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सामान्य वर्ग की मांगों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में सुधार, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
‘बांटोगे तो काटोगे’ नारे पर भी सवाल
सूरज प्रसाद चौबे ने अपने संबोधन में ‘बांटोगे तो काटोगे’ जैसे राजनीतिक नारों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार समाज को एकजुट करने की बात करती है तो सामान्य वर्ग से जुड़े इन मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी वर्गों के बच्चों को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ समान अवसर और जरूरत के आधार पर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी समाज या वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
समाज से जागरूक होने की अपील
बैठक के दौरान चौबे ने सवर्ण समाज के लोगों से अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य को लेकर जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और कानूनी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार से किसी वर्ग के खिलाफ भेदभाव की मांग नहीं की जा रही है, बल्कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और विद्यार्थियों को भी समान अवसर दिए जाने की मांग है।
बैठक में सवर्ण आर्मी भारत के जिला अध्यक्ष पंकज कुमार शुक्ला, राजू पांडेय, अवधेश चौबे, गोविंद तिवारी, राधे कृष्णा, अनिल कुमार पाठक और जीतेन्द्र पाठक सहित संगठन से जुड़े अन्य लोग मौजूद रहे।बैठक में वक्ताओं ने सामान्य वर्ग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और संगठन को मजबूत करने तथा समाज के लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया।
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