यूजीसी रेगुलेशन वापस लेने, आरक्षण में सुधार और एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने की मांग को लेकर 24वें दिन भी धरना जारी
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रविवार को यूजीसी रेगुलेशन वापस लेने, आरक्षण में सुधार और एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने की मांग को लेकर सवर्ण पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय अधिकारी मोर्चा, सवर्ण आर्मी भारत, हिन्दू केसरिया समेत विभिन्न सवर्ण संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय अधिकारी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अलंकार अग्निहोत्री, सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे और सवर्ण आर्मी उत्तर प्रदेश के सचिव रत्नेश पाठक सहित कई लोग मौजूद रहे।
सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप
सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान की मूल अवधारणा के अनुसार जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव निषिद्ध है और इसे अपराध माना गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार दलित और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
चौबे ने यूजीसी रेगुलेशन को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के कारण सवर्ण समाज के लोगों का शोषण हो रहा है और उन्हें पहले से ही अपराधी की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए इसमें बदलाव या इसे समाप्त करने की मांग की।
हालांकि, एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग और यूजीसी रेगुलेशन से जुड़े आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

24वें दिन भी जारी रहा धरना
आयोजकों के अनुसार, यूजीसी रेगुलेशन वापस लेने, आरक्षण में सुधार और एससी-एसटी एक्ट समाप्त करने की मांग को लेकर उनका धरना रविवार को 24वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक शासन और सत्ता की ओर से उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
तीन लोग कल से शुरू करेंगे भूख हड़ताल
सवर्ण पंचायत में निर्णय लिया गया कि सोमवार, 21 सितंबर से चंदन सनातनी, बृजेश मिश्रा और गौतम मिश्रा भूख हड़ताल शुरू करेंगे। आयोजकों ने बताया कि भूख हड़ताल में शामिल लोग केवल जल ग्रहण करेंगे।
आयोजकों के मुताबिक, यह भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक केंद्र सरकार का कोई मंत्री प्रदर्शनकारियों और समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता।
सवर्ण संगठनों ने केंद्र सरकार से यूजीसी रेगुलेशन वापस लेने, आरक्षण व्यवस्था में सुधार करने और एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग दोहराई है। अब प्रशासन और सरकार की ओर से इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजरें हैं।
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