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फर्जी पुलिस बनकर अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, छह गिरफ्तार

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कृष्णानगर पुलिस और सर्विलांस टीम ने गिरोह का किया पर्दाफाश, दो तमंचे, नकदी, स्कॉर्पियो और फर्जी आईडी कार्ड बरामद

लखनऊ। कृष्णानगर थाना पुलिस और सर्विलांस टीम दक्षिणी ने अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक कारोबारी का अपहरण किया था। इसके बाद उसके परिवार से फिरौती के रूप में नकदी और सोने-चांदी के आभूषण लिए गए थे।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो अवैध तमंचे, तीन जिंदा कारतूस, 2.50 लाख रुपये नकद, घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो कार, दो कूटरचित नंबर प्लेट और चार फर्जी पुलिस अधिकारी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पुलिस बनकर कारोबारी को बनाया था बंधक

पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को सुदर्शन घोष पुत्र स्वर्गीय वीरेंद्र चंद्र घोष, निवासी साकेत अपार्टमेंट, पोस्ट ऑफिस राजेंद्रनगर, मवैया चौराहा, थाना आलमबाग, लखनऊ ने कृष्णानगर थाने में लिखित शिकायत दी थी।

शिकायत में उन्होंने बताया कि कार्यालय जाते समय पांच अज्ञात लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया। आरोपियों ने असलहे के बल पर उन्हें डराया-धमकाया और मारपीट की। इसके बाद जान से मारने की धमकी देते हुए उनकी पत्नी को फोन कराया गया और फिरौती की मांग की गई।

पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उनकी पत्नी से नकदी और आभूषण मंगवाए। शिकायत के आधार पर थाना कृष्णानगर में मुकदमा अपराध संख्या 0386/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की।

आठ पुलिस टीमों को जांच में लगाया गया

घटना के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उपायुक्त दक्षिणी की ओर से आठ टीमों का गठन किया गया। इसके साथ ही सर्विलांस सेल, जोन दक्षिणी को भी जांच में लगाया गया।

पुलिस टीमों ने करीब 220 से 240 सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके अलावा तकनीकी साक्ष्यों, मैनुअल जांच और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों की पहचान की गई। जांच के बाद पुलिस ने अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, अनुराग कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में गिरोह के बारे में जानकारी का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका संगठित गिरोह है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के अपराधी शामिल हैं। गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिनके पास काफी धन होने की जानकारी मिलती थी। इसके बाद उनकी गतिविधियों की रेकी कर योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया जाता था।

आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि लखनऊ के पीड़ित की गतिविधियों की जानकारी गिरोह के एक स्थानीय सदस्य ने दी थी, जो पीड़ित के करीबी संपर्क में था। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित के आने-जाने की रेकी की।

पुलिस के मुताबिक, 12 सितंबर को आरोपियों ने पीड़ित के कार्यालय के पास खुद को पुलिस अधिकारी बताकर फर्जी पहचान पत्र दिखाया और पूछताछ के बहाने उन्हें गाड़ी में बैठा लिया। इसके बाद उन्हें धमकाकर परिवार से रुपये मंगवाने के लिए मजबूर किया गया।

13 लाख रुपये और आभूषण लेने का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित से जबरन उसकी पत्नी को फोन कराया और उसे छोड़ने के बदले फिरौती मांगी। बाद में पीड़ित के चालक के माध्यम से कथित तौर पर 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण प्राप्त किए गए।

आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को शहीद पथ के पास छोड़ दिया और घटना के बाद अलग-अलग राज्यों में चले गए। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल वाहनों पर कूटरचित नंबर प्लेट लगा रखी थी, ताकि उनकी पहचान न हो सके।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी बताया कि फिरौती से मिली रकम और आभूषण आपस में बांट लिए गए थे। कुछ रकम खर्च करने के बाद वे दूसरी घटना को अंजाम देने के लिए दोबारा लखनऊ आए थे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ये छह आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें बुलंदशहर और बिहार के निवासी शामिल हैं।

  1. अनुराग पुत्र धर्मेंद्र सिंह, निवासी रानऊ रहम अलीपुर, थाना शिकारपुर, बुलंदशहर, उम्र 26 वर्ष।
  2. अनुराग कुमार पुत्र स्वर्गीय प्रमोद कुमार, निवासी न्यू कॉलोनी अतरदा, थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरपुर, बिहार, उम्र 33 वर्ष।
  3. लवी कुमार पुत्र मनोज कुमार, निवासी जानीपुर कला, थाना शिकारपुर, बुलंदशहर, उम्र 30 वर्ष।
  4. दीपांशु कुमार पुत्र मनवीर सिंह, निवासी जानीपुर, थाना शिकारपुर, बुलंदशहर, उम्र 24 वर्ष।
  5. आकाश चौधरी पुत्र सतीश चंद्र चौधरी, निवासी जानीपुर कला, थाना शिकारपुर, बुलंदशहर, उम्र 23 वर्ष।
  6. मनीष कुमार पुत्र स्वर्गीय सुरेंद्र शर्मा, निवासी अकाउंट्स कॉलोनी, सोनपुर, थाना सोनपुर, जिला सारण, बिहार, उम्र 24 वर्ष।

आरोपियों से बरामद सामान

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से निम्न सामान बरामद किया है—

  • दो अवैध 315 बोर के तमंचे
  • तीन जिंदा कारतूस
  • 2.50 लाख रुपये नकद
  • घटना में प्रयुक्त एक स्कॉर्पियो कार
  • दो कूटरचित नंबर प्लेट
  • चार फर्जी पुलिस अधिकारी पहचान पत्र

पुलिस के अनुसार, बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता की अतिरिक्त धाराओं और आयुध अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

दो आरोपियों का आपराधिक इतिहास सामने आया

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी आकाश चौधरी के खिलाफ बुलंदशहर के शिकारपुर थाने में मारपीट, अवैध कब्जे, धमकी और आयुध अधिनियम से जुड़े कई मुकदमे दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2020 और 2023 के मामले शामिल हैं।

वहीं, आरोपी अनुराग पुत्र धर्मेंद्र के खिलाफ गाजियाबाद कमिश्नरेट के विजय नगर थाने में वर्ष 2025 में भारतीय न्याय संहिता और आयुध अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार

इस मामले का सफल खुलासा करने वाली कृष्णानगर थाना पुलिस और सर्विलांस सेल, जोन दक्षिणी की संयुक्त टीम को पुलिस उपायुक्त दक्षिणी की ओर से 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। साथ ही, आरोपियों द्वारा पूर्व में की गई अन्य घटनाओं और बरामद सामान के संबंध में भी जांच की जा रही है।

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