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राजस्व वादों में सुस्ती पर योगी सरकार सख्त, पांच अफसर निलंबित

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लंबित मामलों की धीमी प्रगति पर कार्रवाई, चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार के खिलाफ शुरू हुई अनुशासनिक जांच

लखनऊ। प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। समयसीमा के भीतर राजस्व वादों का निस्तारण नहीं करने और कामकाज में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाने पर चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

सरकार की इस कार्रवाई से राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर अधिकारियों में जवाबदेही तय करने का स्पष्ट संदेश गया है।

उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद लिया गया फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश में लंबित राजस्व वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि राजस्व मामलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटाया जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि आम लोगों और किसानों से जुड़े राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर तेजी से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद राजस्व परिषद ने प्रदेशभर के राजस्व न्यायालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा कराई।

धारा 34 के मामलों की हुई अधिकारीवार जांच

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 34 के तहत दाखिल मामलों की न्यायालयवार और अधिकारीवार समीक्षा की गई।

समीक्षा में कुछ अधिकारियों के न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई। शासन की प्राथमिकता के बावजूद मामलों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद परिषद ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।

इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

निलंबित किए गए अधिकारियों में पवन कुमार सिंह, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार पट्टी, प्रतापगढ़ और वर्तमान में तहसीलदार प्रयागराज; अतुल हर्ष, तहसीलदार बलिया; हरेराम यादव, तत्कालीन नायब तहसीलदार धनघटा और वर्तमान में तहसीलदार गोंडा; आनंद ओझा, तहसीलदार खलीलाबाद, संतकबीरनगर तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ शामिल हैं।

निलंबन के साथ विभागीय जांच भी शुरू

राजस्व परिषद ने केवल निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। पांचों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

लंबित मामलों पर लगातार नजर

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई महज एक बार की कवायद नहीं है। राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। अधिकारियों के स्तर पर मामलों के निस्तारण की नियमित समीक्षा होगी।

जहां भी निर्धारित समयसीमा में राजस्व वादों का निस्तारण नहीं होगा या काम में उदासीनता सामने आएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

किसानों और आम लोगों को समय पर न्याय देने पर जोर

राजस्व विवादों का सीधा संबंध जमीन, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण मामलों से होता है। ऐसे मामलों में लंबे समय तक फैसला नहीं होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सरकार का जोर अब राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को तेजी से निपटाने के साथ-साथ व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने पर है। परिषद ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी या शिथिलता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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