वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने से जारी सैन्य विराम के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ फिर से कार्रवाई शुरू कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हमले और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
मामला उस समय गंभीर हुआ जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के लड़ाके समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने और रॉकेट तैनात करने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मार्गों की सुरक्षा के लिए की गई।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी मिसाइलों को जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दागे जाने की जानकारी सामने आई। जॉर्डन की सेना ने कई मिसाइलों को हवा में ही रोकने का दावा किया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्षों के बीच तनाव एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है।
ईरानी पक्ष ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसावे वाला कदम बताते हुए जवाब देने की चेतावनी दी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की बात कही है। इससे आने वाले दिनों में और हमलों की आशंका बढ़ गई है।
MQ-9 ड्रोन को लेकर भी दावा
तनाव के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा भी सामने आया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल गतिविधियां पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल और वैश्विक शिपिंग पर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
अमेरिका का दावा है कि उसके अभियान के कारण जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन युद्ध के कारण यहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या सामान्य स्तर की तुलना में काफी कम है। ब्रिटिश मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी क्षेत्र में एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला होने की जानकारी दी है।
सैन्य कार्रवाई के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा
अमेरिका ने ईरान पर केवल सैन्य दबाव ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि आर्थिक दबाव का उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाना है। अमेरिका ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है।
हालांकि दोनों देशों के बीच पहले भी संघर्षविराम और समझौते की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन विवादित मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही जैसे मुद्दे अब भी बातचीत की राह में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
आगे क्या?
अमेरिका और ईरान दोनों ही व्यापक युद्ध से बचने की बात करते रहे हैं, लेकिन हालिया जवाबी हमलों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक और सैन्य कार्रवाई होती है, तो संघर्ष का दायरा खाड़ी के अन्य देशों तक फैलने और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर बढ़ने की आशंका है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य और वाशिंगटन-तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
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