नई दिल्ली । सरकार ने प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान वाले लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश कर दिया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने विधेयक को सदन में पेश किया, लेकिन इस दौरान विपक्ष ने हंगामा जारी रखा। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों ने शांति बनाए रखने और सदन की कार्यवाही को चलने देने का आग्रह किया। हालांकि, विपक्ष छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर हंगामा करते रहे, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
बिल को लेकर क्या बोले ओम बिरला?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों का नाम लिया और कहा कि क्या इस विधेयक को लेकर वे कुछ बोलना चाहते हैं। हालांकि, किसी विपक्षी सदस्य ने इस पर अपनी बात नहीं रखी। ओम बिरला ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण विधेयक है। विधेयक से सदन और देश की मंशा पर व्यापक चर्चा होगी। सभी दलों के लोग इस विषय पर बहुत दिनों से चर्चा की मांग कर रहे थे। यह सुधार का प्रथम कदम है। मैं सोचता हूं कि सदन में इस पर चर्चा हो, सभी अपने मत व्यक्त करें ताकि हम इस पर बात कर सकें कि किस तरह से इस विधेयक के माध्यम से पेपर लीक को रोकने का समुचित कदम उठा सकते हैं।’
किरेन रिजिजू ने विपक्ष से की चर्चा की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर विपक्ष से सदन में चर्चा की अपील की। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्रों की चिंताओं को देखते हुए यह महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किया जा रहा है, लेकिन कांग्रेस और कुछ विपक्षी सदस्य इस पर चर्चा करने के बजाय हंगामा कर रहे हैं। किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए अहम फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा सुधारों को लेकर टास्क फोर्स का गठन किया गया है और ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी और समयबद्ध सजा का प्रावधान किया गया है।
नये बिल में हैं क्या-क्या प्रस्ताव?
लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल होगी। इसके अलावा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन से संबंधित इस विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम 7 साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है।
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