नीट पेपर लीक विवाद के बीच बड़ा फैसला, मौजूदा मंत्रालयों के साथ संभालेंगे शिक्षा विभाग
एनटीए सुधार और NEET 2027 की चुनौतियां होंगी सबसे बड़ी परीक्षा
नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। राष्ट्रपति भवन ने शनिवार शाम इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंप दिया गया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी देने के निर्देश जारी किए गए।
नीट विवाद के बीच सरकार का त्वरित फैसला
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद नए शिक्षा मंत्री के नाम का ऐलान बेहद तेजी से किया गया। सरकार ने मंत्रालय में किसी तरह का प्रशासनिक खालीपन न रहे, इसके लिए अनुभवी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब शिक्षा मंत्रालय देश की सबसे बड़ी परीक्षा सुधार प्रक्रिया से गुजर रहा है।
कौन हैं नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे, जबकि उनकी माता मालतीबाई गृहिणी थीं। साधारण परिवार में पले-बढ़े जोशी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली से बी.ए. की डिग्री हासिल की।
कॉलेज के दिनों से ही वे सामाजिक गतिविधियों और जनहित के मुद्दों में सक्रिय रहे। बाद में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने हुबली में एक छोटा औद्योगिक व्यवसाय भी संचालित किया।
तिरंगा आंदोलन से संसद तक का सफर
प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 1992-94 के दौरान हुबली के चर्चित ईदगाह मैदान तिरंगा आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक में ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ का नेतृत्व भी किया।
उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें वर्ष 1998 में धारवाड़ जिला अध्यक्ष बनाया। इसके बाद वर्ष 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। वे लगातार 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में जीत दर्ज कर पांच बार लोकसभा सांसद बने।
वर्ष 2014 से 2016 तक वे कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
कई अहम मंत्रालयों का अनुभव
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वे पहले संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री रह चुके हैं।
वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनके पास तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी होगी।
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में उनका प्रमुख लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना और 2070 तक भारत को नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचाना है।
नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी चुनौतियां
प्रह्लाद जोशी को ऐसे समय शिक्षा मंत्रालय की कमान मिली है जब देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर व्यापक सुधारों की प्रक्रिया चल रही है।
शिक्षा मंत्रालय इस समय जिन प्रमुख सुधारों पर काम कर रहा है, उनमें शामिल हैं—
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन।
पेपर लीक रोकने के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था।
परीक्षा संचालन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना।
वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (Computer-Based Test) बनाने की तैयारी।
परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी और जवाबदेही बढ़ाना।
इन सुधारों को लागू कराने की जिम्मेदारी अब काफी हद तक प्रह्लाद जोशी के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी।
लगातार 35 दिन चला था आंदोलन
नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देशभर में छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी था। प्रदर्शन के 35वें दिन धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने देश-विरोधी ताकतों को स्थिति का लाभ उठाने से रोकने और शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है।
उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशकों से उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए कार्य किया है और उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की नींव होती है।
विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने सद्भावना के आधार पर आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
अब सभी की नजरें नए शिक्षा मंत्री पर
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना, एनटीए में सुधार लागू करना, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना और आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना होगा। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों को किस गति और प्रभाव के साथ लागू करती है।
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