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ट्रांसजेंडर अधिकारों और पशु क्रूरता कानून पर लखनऊ पुलिस का विशेष प्रशिक्षण

70 पुलिसकर्मियों को किया गया संवेदनशील

लखनऊ। पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष प्रशिक्षण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में आयोजित इस कार्यशाला में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों, उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 के प्रावधानों पर पुलिसकर्मियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में कमिश्नरेट के विभिन्न थानों पर तैनात 70 उपनिरीक्षकों और महिला आरक्षियों ने भाग लिया।

यह कार्यक्रम पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत तथा पुलिस उपायुक्त (महिला अपराध एवं सुरक्षा) ममता रानी चौधरी के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यशाला का पर्यवेक्षण सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध) शाहिदा नसरीन ने किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की स्टेट एग्जीक्यूटिव मेंबर एवं एडवाइजर देविका देवेन्द्र एस. मंगलामुखी मुख्य प्रशिक्षक के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम-2019 और नियमावली-2020 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है। पुलिस की भूमिका ऐसे मामलों में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और शिकायतों के निस्तारण के दौरान संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों, उनके साथ होने वाले भेदभाव की रोकथाम, शिकायतों के प्रभावी निस्तारण तथा सम्मानजनक व्यवहार के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी मामले में पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष, संवेदनशील और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

प्रशिक्षण का दूसरा महत्वपूर्ण विषय पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 रहा। पुलिसकर्मियों को अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, पशुओं के प्रति क्रूरता से जुड़े अपराधों की पहचान, शिकायत मिलने पर कानूनी प्रक्रिया तथा प्रभावी कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं के प्रति हिंसा और क्रूरता के मामलों में भी पुलिस की समयबद्ध और विधिसम्मत कार्रवाई बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी पुलिसकर्मियों ने विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से प्रश्न भी पूछे और व्यवहारिक परिस्थितियों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा की। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों के प्रति संवेदनशील और भरोसेमंद पुलिस व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस बल को समय-समय पर नए कानूनों, मानवाधिकारों और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया जा सके। इससे पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा कानून का प्रभावी और मानवीय तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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