पथराव-लाठीचार्ज में कई पुलिसकर्मी घायल, 16 मेट्रो स्टेशन बंद
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क से संसद तक जारी आंदोलन बुधवार को और उग्र हो गया। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिन और रात में दो चरणों में हिंसक झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, बोतलबाजी और लाठीचार्ज की घटनाओं में दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), दो इंस्पेक्टर समेत करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान घायल हो गए। कई प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की सूचना है। देर रात तक जंतर-मंतर और आसपास का इलाका भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में छावनी में तब्दील रहा।
अचानक कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया
दिल्ली पुलिस के अनुसार, पहली हिंसक घटना शाम करीब 4:30 बजे जंतर-मंतर के पास हुई। प्रदर्शन के दौरान अचानक कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें एसीपी जय प्रकाश घायल हो गए। इसके बाद रात करीब 8:30 बजे हालात एक बार फिर बिगड़ गए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रहे थे। टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग पर पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तभी भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों और बोतलों से हमला कर दिया। इस दौरान कनॉट प्लेस के एसीपी विवेक भगत गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने तत्काल लाठीचार्ज कर उन्हें भीड़ से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस का दावा- तलवार और खुखरी लेकर पहुंचे उपद्रवी
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि हिंसा के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी खुलेआम तलवार, खुखरी, डंडे और पत्थर लेकर घूमते दिखाई दिए। पुलिस का आरोप है कि इन्हीं हथियारों से सुरक्षाबलों पर हमला किया गया। पुलिस ने यह भी आशंका जताई कि भीड़ में कुछ बाहरी असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे, जिनकी वजह से स्थिति ज्यादा हिंसक हो गई। इस पूरे पहलू की जांच शुरू कर दी गई है।
आंसू गैस और लाठीचार्ज से भीड़ को हटाया गया
हालात बेकाबू होते देख दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को मौके पर बुलाया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद भीड़ धीरे-धीरे पीछे हटी, लेकिन देर रात तक जंतर-मंतर, संसद मार्ग और टॉलस्टॉय मार्ग के आसपास तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी और लाउडस्पीकर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
हिंसा में घायल दो एसीपी, दो इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों और आरएएफ जवानों को तत्काल डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों का उपचार जारी है।
सीजेपी का दावा- आंदोलन में घुस गए असामाजिक तत्व
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हिंसा के लिए असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। पार्टी का कहना है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोग शांतिपूर्ण आंदोलन में घुस आए और उन्होंने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। सीजेपी ने कहा कि उसका आंदोलन शांतिपूर्ण था और हिंसा से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
देशभर में फैला आंदोलन
दिल्ली से शुरू हुआ आंदोलन अब देश के कई शहरों तक पहुंच गया है। बुधवार को पटना, जयपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम और मुंबई समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। कई जगह रैलियां, धरने और विरोध मार्च निकाले गए।
10 एफआईआर दर्ज, वीडियो फुटेज खंगाल रही पुलिस
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई से शुरू हुए आंदोलन के सिलसिले में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की मदद से हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है।
16 मेट्रो स्टेशन बंद, हजारों यात्रियों को हुई परेशानी
हिंसक घटनाओं के बाद सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने केंद्रीय दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इनमें लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम शामिल रहे।
हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज सुविधा जारी रखी गई। ट्रेनों का संचालन चलता रहा, लेकिन वे बंद स्टेशनों पर नहीं रुकीं। इससे हजारों यात्रियों को अपने गंतव्य से आगे उतरकर सड़क मार्ग से लौटना पड़ा।
ऑटो और कैब चालकों ने बढ़ाए किराये
स्टेशन बंद होने के कारण ऑटो, ई-रिक्शा और ऑनलाइन कैब सेवाओं की मांग अचानक बढ़ गई। यात्रियों का आरोप है कि सामान्य 30–40 रुपये के किराये की जगह 100–150 रुपये तक वसूले गए। वहीं सर्ज प्राइसिंग के कारण कई कैब का किराया कई गुना बढ़ गया और यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
दिल्ली में सुरक्षा और कड़ी, 24 कंपनियां तैनात
स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास समेत संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ और उसकी विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 24 कंपनियां दिल्ली में तैनात कर दी हैं। कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है।
वांगचुक ने सरकार को लिखा पत्र
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित अन्य मुद्दों पर सकारात्मक पहल करती है तो वह छात्रों से आंदोलन स्थगित करने की अपील करेंगे।
सीजेपी ने रखी बातचीत की शर्त
सीजेपी ने कहा कि वह सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वार्ता किसी मंत्री के आवास या कार्यालय में नहीं बल्कि जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर बातचीत का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया।
तनाव बरकरार, जांच तेज
हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग, टॉलस्टॉय मार्ग और आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है। पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं राजधानी में विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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