फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर पीएम मोदी
‘भारत इनोवेट्स’ से जी-7 तक वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन

नीस (फ्रांस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच दिवसीय आधिकारिक विदेश यात्रा पर फ्रांस पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर शुरू हुई इस यात्रा को भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और नवाचार सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया।
भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा
एयरपोर्ट पर फ्रांस के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उनका जोरदार अभिनंदन किया।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उनकी यह यात्रा केवल नीस तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें एवियां, पेरिस और स्लोवाकिया में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान होने वाली द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के जरिए भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा।
आज होगी मैक्रों से अहम वार्ता
यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत-फ्रांस ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेंगे और रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वास्थ्य तकनीक, सेमीकंडक्टर तथा स्टार्टअप क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, नवाचार, मेडिकल टेक्नोलॉजी, एआई, स्पेस टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर से जुड़े करीब एक दर्जन समझौतों पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा 114 राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़े महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत इन विमानों में स्वदेशी हथियार प्रणालियों के एकीकरण और सोर्स कोड तक पहुंच जैसे मुद्दों को भी उठाएगा।
‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप, वेंचर कैपिटल फंड, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ भाग लेंगे।
इस पहल का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले प्रतिभाशाली स्टार्टअप्स को वैश्विक मंच उपलब्ध कराना, उन्हें निवेशकों और उद्योग जगत से जोड़ना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर प्रदान करना है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा है कि अब सवाल यह नहीं है कि भारत नवाचार करेगा या नहीं, बल्कि यह है कि भारत के साथ नवाचार कौन करेगा।
स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा
फ्रांस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे।
इस दौरान व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल निर्माण, रेलवे, औद्योगिक सहयोग और नई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी। यह यात्रा मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
जी-7 शिखर सम्मेलन में भी होंगे शामिल
यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियां में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में वे जी-7 देशों के नेताओं, आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
भारत की भागीदारी को वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज और विश्व अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा तथा तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
पेरिस में वीवा-टेक सम्मेलन में भारत का दम
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजन ‘वीवा-टेक’ में भाग लेंगे। इस वर्ष सम्मेलन में भारत का मंडप सबसे बड़ा होगा, जो वैश्विक नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है। इस पूरे दौरे को भारत की तकनीकी क्षमता, आर्थिक प्रगति और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
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