भारतीय निशानेबाजी के ‘मशाल वाहक’ जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

देहरादून। भारतीय निशानेबाजी जगत को गहरा आघात पहुंचाते हुए देश के दिग्गज निशानेबाज और प्रसिद्ध कोच Jaspal Rana का निधन हो गया। कुछ समय पहले उन्हें हृदयघात आया था, जिसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से खेल जगत, उत्तराखंड और देशभर के खेल प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा ने अपने असाधारण प्रदर्शन, ऐतिहासिक उपलब्धियों और युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शन से भारत को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
उत्तराखंड की धरती से निकला अंतरराष्ट्रीय सितारा
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को Uttarkashi जिले में हुआ था। उनका पैतृक गांव नैनबाग क्षेत्र का चिलामू था। उनके पिता Narayan Singh Rana उत्तराखंड सरकार में खेल मंत्री रह चुके थे।कम उम्र में ही उन्होंने निशानेबाजी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। वर्ष 1994 में मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने 1994 Asian Games में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय निशानेबाजी का उभरता सितारा बना दिया।
एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में रचा इतिहास
जसपाल राणा ने अपने करियर में एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और दक्षिण एशियाई खेलों में भारत को अनेक पदक दिलाए। वर्ष 1995 में चेन्नई और 1999 में काठमांडू में आयोजित SAIF खेलों में उन्होंने आठ-आठ स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उनकी सटीक निशानेबाजी को दुनिया भर में सराहा गया।उनकी शानदार उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1994 में Arjuna Award, 1997 में Padma Shri और 2020 में Dronacharya Award से सम्मानित किया।
सफल खिलाड़ी से बने प्रेरणादायी कोच
खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।उन्होंने Saurabh Chaudhary और Anish Bhanwala जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तराशा। वह भारतीय स्टार निशानेबाज Manu Bhaker के भी कोच रहे। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर द्वारा जीते गए ऐतिहासिक दो कांस्य पदकों के पीछे जसपाल राणा की कोचिंग और रणनीति को महत्वपूर्ण माना गया।बाद में National Rifle Association of India (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा का हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था।
खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति
जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने न केवल एक खिलाड़ी के रूप में देश का नाम रोशन किया, बल्कि एक कोच के रूप में भी नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाने में अहम योगदान दिया।उनके निधन के बाद खिलाड़ियों, खेल संगठनों और खेल प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भारतीय निशानेबाजी का “मशाल वाहक” बताया है। खेल जगत का मानना है कि जसपाल राणा की उपलब्धियां और उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आने वाले वर्षों तक उनकी विरासत को आगे बढ़ाते रहेंगे।
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