“मम्मी कब आएंगी?”… पांच साल के अनीस का यह सवाल सुनकर नम हो रही हैं आंखें, शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार

बांदा। यूपी के बांदा जिले में एक गांव की कच्ची गली में बने छोटे से घर के बाहर पांच साल का अनीस बार-बार दरवाजे की ओर देखता है। कभी आंगन में खेलते-खेलते अचानक रुक जाता है, तो कभी घर में मौजूद लोगों से एक ही सवाल पूछता है—”मम्मी कब आएंगी?” उसके इस मासूम सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। घर के बड़े-बुजुर्ग, रिश्तेदार और पड़ोसी उसे बहलाने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन उनकी अपनी आंखें भी भर आती हैं।
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू मासूम बच्चा
अनीस को अभी यह नहीं पता कि जिस मां का वह इंतजार कर रहा है, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगी। उसे यह भी नहीं मालूम कि उसकी मां कौशल्या की निर्मम हत्या कर दी गई है और इस हत्या का आरोप उसी व्यक्ति पर लगा है, जिसके साथ उसने नई जिंदगी शुरू करने का सपना देखा था।
उत्तराखंड के हरिद्वार के जंगलों में मिले एक महिला के शव की पहचान जब बांदा की 20 वर्षीय कौशल्या के रूप में हुई, तो पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू वह मासूम बच्चा है, जो अपनी मां के लौटने की राह देख रहा है।
प्यार, बिछड़न और फिर मौत तक का सफर
कौशल्या की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी की तरह उतार-चढ़ाव से भरी रही। उसकी शादी पप्पू नामक युवक से हुई थी। दोनों का एक बेटा अनीस भी है। परिवार सामान्य जिंदगी जी रहा था, लेकिन कुछ समय बाद रिश्तों में दूरियां आने लगीं।करीब एक साल पहले कौशल्या घर छोड़कर चली गई थी। उस समय परिवार ने उसे समझा-बुझाकर वापस लाया। परिजनों ने गलती मानकर उसे माफ भी कर दिया। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
फरवरी 2026 में वह अपने रिश्तेदार गोविंदा के साथ चली गई
फरवरी 2026 में वह अपने रिश्तेदार ओमप्रकाश उर्फ गोविंदा के साथ चली गई। मामला पुलिस तक पहुंचा। बाद में दोनों को दिल्ली से लाया गया। जब दोनों ने साथ रहने की इच्छा जताई, तो परिवारों के बीच समझौता हुआ और उनकी शादी करा दी गई।शायद सभी को लगा था कि अब कौशल्या की जिंदगी नए सिरे से शुरू होगी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रिश्ता उसकी जिंदगी का आखिरी अध्याय बन जाएगा।
शक ने ले ली जान
पुलिस जांच के मुताबिक शादी के कुछ समय बाद ही गोविंदा को अपनी पत्नी पर शक होने लगा। उसे लगता था कि कौशल्या किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करती है। यही शक धीरे-धीरे उसके मन में जहर बनकर भरता गया।बताया जाता है कि इसी शक के आधार पर उसने अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रच डाली। अपने बड़े भाई और बहनोई को साथ लेकर वह कौशल्या को हरिद्वार घुमाने के बहाने ले गया। वहां सुनसान जंगल में उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई।इतना ही नहीं, पहचान मिटाने के लिए चेहरे पर तेजाब डाल दिया गया और शव को जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस के अनुसार यह पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई।
मां का इंतजार कर रहा है मासूम
गांव के लोग बताते हैं कि जब पुलिस कौशल्या की हत्या की जानकारी लेकर गांव पहुंची, तब सबसे ज्यादा बेचैन अनीस था। पुलिस और लोगों की भीड़ देखकर वह घबरा गया।वह बार-बार पूछता रहा—”मां को पुलिस क्यों पकड़कर ले गई?”किसी के पास उसके सवाल का जवाब नहीं था। कोई उसे गोद में उठा लेता, कोई टॉफी देकर चुप कराने की कोशिश करता। लेकिन कुछ देर बाद वह फिर वही सवाल दोहराने लगता।
इतनी छोटी उम्र में यह सच बताने की हिम्मत किसी में नहीं
घर के बाहर खड़ा होकर वह आने-जाने वाले हर व्यक्ति को देखता है। दरवाजे की ओर उसकी नजरें टिकी रहती हैं, मानो अभी उसकी मां सामने से आती दिखाई दे जाएगी।गांव की महिलाएं उसे देखकर रो पड़ती हैं। बुजुर्गों की आंखें नम हो जाती हैं। हर कोई जानता है कि जिस मां का वह इंतजार कर रहा है, वह अब कभी नहीं लौटेगी। लेकिन इतनी छोटी उम्र में यह सच बताने की हिम्मत किसी में नहीं है।
गांव में पसरा मातम
कौशल्या की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। चौपालों, गलियों और घरों में बस इसी घटना की चर्चा है। लोग हैरान हैं कि एक संदेह ने इतनी बड़ी त्रासदी को जन्म दे दिया।मृतका की पहली सास बताती हैं कि कौशल्या मेहनती और मिलनसार थी। घर के कामकाज में भी निपुण थी। परिवार ने हमेशा उसे अपनाया और उसके फैसलों का सम्मान किया। दूसरी शादी के फैसले पर भी किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन आज वही परिवार उसकी मौत का दुख झेल रहा है।
एक सवाल जो लंबे समय तक गूंजेगा
यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह उस मासूम बचपन की कहानी भी है, जिसने बिना किसी गलती के अपनी मां को खो दिया। यह उस परिवार की कहानी है, जो रिश्तों के उलझाव और अविश्वास की भेंट चढ़ गया।अनीस आज भी अपनी मां का इंतजार कर रहा है। उसके लिए दुनिया अभी भी उतनी ही सरल है, जितनी किसी पांच साल के बच्चे की होती है। उसे नहीं पता कि मौत क्या होती है, हत्या क्या होती है और साजिश किसे कहते हैं।उसे सिर्फ इतना पता है कि उसकी मां कहीं गई है और उसे वापस आना चाहिए।
“मम्मी कब आएंगी?”बस यही सवाल पूछ रहा मासूम
शायद आने वाले दिनों में उसे सच्चाई पता चल जाएगी, लेकिन फिलहाल उसके मासूम होंठों पर सिर्फ एक ही सवाल है— “मम्मी कब आएंगी?” और यही सवाल सुनकर पूरे गांव की आंखें नम हो जाती हैं। मासूम बच्चे को लेकर गांव से लेकर रिश्तेदार भी परेशान है। क्योंकि लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मासूम को कब तक ऐसे फुसलाते रहेंगे।
महिलाओं के साथ अक्सर हो रहा इस तरह का धोखा
आये दिन ऐसे मामले प्रकाश में आ रहे है। इसके बाद भी महिलाएं गैर पुरुष पर भरोसा करके अपना जीवन बर्बाद कर ले रही है। जबकि घटनाओं से सबक लेकर महिलाओं को कोई कदम उठाना चाहिए । क्योंकि पैसे व जमीन की लालच में प्रेमी प्रेमिका को और पत्नी पति को प्रेमिका प्रेमी और प्रेमिका के लिए लोग पत्नी की हत्या कर दे रहे है और इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
यह भी पढ़े : पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने बनाई ‘इश्क करो पार्टी’, सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा
यह भी पढ़े : फायरिंग मामले में खान सर को पटना कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
यह भी पढ़े : दिल्ली में मौत का तांडव, रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, 21 जिंदगियां राख
यह भी पढ़े : यूपी में स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला, उपभोक्ता खुद तय करेंगे प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर
यह भी पढ़े : आर प्रज्ञानंद ने रचा इतिहास, नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय बने




