smupnews

ग्राम प्रधानों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, अब प्रशासक बनकर संभालेंगे पंचायतों की कमान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के ग्राम प्रधानों को बड़ा राहतभरा तोहफा देते हुए सोमवार देर शाम महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न होने के कारण अब वर्तमान ग्राम प्रधान ही अपने-अपने गांवों में प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मंजूरी के बाद पंचायत राज विभाग ने यह आदेश जारी किया, जिससे ग्राम पंचायतों के कामकाज को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

57 हजार 694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा

प्रदेश की 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव होने तक पंचायतों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। ग्राम प्रधान संगठनों की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि नए चुनाव संपन्न होने तक वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाए, ताकि विकास कार्य और ग्रामीण व्यवस्थाएं प्रभावित न हों। सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

वर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे

जारी आदेश के अनुसार 27 मई से वर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे। इनके प्रशासक के रूप में नियुक्ति संबंधी आदेश संबंधित जिलों के जिलाधिकारी जारी करेंगे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायतों में दैनिक और नियमित कार्य पूर्व की तरह चलते रहेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं और आवश्यक सेवाओं पर कोई असर न पड़े।हालांकि सरकार ने यह भी तय किया है कि प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे ग्राम प्रधान केवल रूटीन और आवश्यक प्रशासनिक कार्य ही कर सकेंगे। किसी भी बड़े या नीतिगत फैसले से जुड़े प्रस्ताव सीधे जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के पास भेजे जाएंगे और अंतिम निर्णय जिलाधिकारी स्तर पर लिया जाएगा।

ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी

प्रदेश में यह पहला अवसर होगा जब ग्राम पंचायत स्तर पर इस प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जा रही है। शासन का मानना है कि इससे पंचायतों में प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी और ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। यह व्यवस्था छह माह या पंचायत चुनाव संपन्न होने तक लागू रह सकती है।सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में खुशी का माहौल है। प्रधान संगठनों ने इसे ग्रामीण प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के हित में लिया गया बड़ा निर्णय बताया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को पंचायत स्तर पर प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

यह भी पढ़े : पेट्रोल-डीजल ने फिर दिया महंगाई का झटका, 10 दिन में चौथी बार बढ़े दाम

यह भी पढ़े : हर ब्लॉक में लगेगी जनता दरबार जैसी चौपाल, सड़क पर नमाज और सार्वजनिक कुर्बानी पर सख्त रोक

यह भी पढ़े : 2027 चुनाव मिशन में जुटी बसपा, मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया ‘वोट सुरक्षा’ मंत्र

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *