लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के विरोध में आंदोलन कर रही विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अब प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान तेज कर दिया है। संघर्ष समिति का आरोप है कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की नीतियों और संविदा कर्मियों की छंटनी के कारण बिजली व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं और किसानों पर पड़ रहा है।

संघर्ष समिति ने शुरू किया जन-जागरण अभियान

संघर्ष समिति के बैनर तले चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मध्यांचल के विभिन्न जनपदों में उपभोक्ताओं, किसानों और आम नागरिकों को बिजली व्यवस्था पर पड़ रहे दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान के दौरान कर्मचारियों द्वारा जनता को बताया जाएगा कि किस तरह वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग और निजीकरण की प्रक्रिया से बिजली आपूर्ति व्यवस्था कमजोर हो रही है।संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के कई जनप्रतिनिधियों ने भी पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की नीतियों पर चिंता जताते हुए वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

लखनऊ, अयोध्या और बरेली जैसे शहरों में नई व्यवस्था लागू हो चुकी

इसके बावजूद प्रबंधन लगातार चरणबद्ध तरीके से विभिन्न शहरों में इसे लागू कर रहा है।समिति के अनुसार नवंबर 2024 में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला लिया गया था, जिसका बिजली कर्मचारी लगातार लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं। अब पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों में भी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग तेजी से लागू की जा रही है। सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा के साथ-साथ राजधानी लखनऊ, अयोध्या और बरेली जैसे शहरों में नई व्यवस्था लागू हो चुकी है।

उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को यह समझने में दिक्कत हो रही है कि किस समस्या के समाधान के लिए किस कार्यालय में संपर्क किया जाए। इसके चलते उपभोक्ताओं को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना पड़ रहा है।समिति का कहना है कि वर्षों से कार्यरत अनुभवी संविदा कर्मियों की छंटनी से बिजली वितरण तंत्र का रखरखाव और फॉल्ट सुधार कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर सीधे तौर पर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता पर दिखाई दे रहा है और गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बिजली कर्मियों पर लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही

संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मियों पर लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है। समिति ने कहा कि उनका आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं और किसानों को संभावित बिजली संकट के प्रति सचेत करना भी इसका उद्देश्य है।निजीकरण विरोधी आंदोलन के 529 दिन पूरे होने पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों और परियोजनाओं में विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आंदोलन को और व्यापक और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

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