लखनऊ। राजधानी में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने संविदा और आउटसोर्स कर्मियों की छंटनी के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का कहना है कि एक ओर नवरात्र और रामनवमी जैसे बड़े त्योहारों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए इन कर्मियों से लगातार ड्यूटी कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर 1 अप्रैल से बड़े पैमाने पर छंटनी की जा रही है।

इस फैसले से कर्मचारियों में भारी आक्रोश

समिति के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के इस फैसले से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जो कर्मी दिन-रात मेहनत कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था संभाल रहे हैं, उन्हें ही नौकरी से हटाने के नोटिस दिए जा रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सैकड़ों कर्मियों पर छंटनी की तलवार

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में “वर्टिकल व्यवस्था” लागू कर कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है। गोमतीनगर जोन और जानकीपुरम जोन में मिलाकर 188 कर्मियों को हटाया जा चुका है। इसके अलावा लेसा क्षेत्र में पहले ही 171 कर्मियों की छंटनी हो चुकी है और 1 अप्रैल से करीब 326 और कर्मियों को हटाने की तैयारी है।

त्योहार में ड्यूटी, लेकिन नहीं मिल रहा अवकाश

समिति ने यह भी कहा कि जहां सरकार ने रामनवमी पर अवकाश घोषित किया है, वहीं बिजली कर्मियों को पहले छुट्टी दी गई और फिर उसी दौरान ड्यूटी के आदेश दे दिए गए। इससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया है।

सरकार से रखी गई प्रमुख मांगें

संविदा/आउटसोर्स कर्मियों की छंटनी पर तुरंत रोक लगे

हटाए गए कर्मियों को दोबारा सेवा में लिया जाए

न्यूनतम मानदेय का लाभ बिजली कर्मियों को भी मिले

“वर्टिकल व्यवस्था” को समाप्त किया जाए

आंदोलन की चेतावनी

संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।

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