एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया। पुलिसिंग को और अधिक सशक्त, संवेदनशील और जनोन्मुखी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

11 सत्रों में रखे गए सभी प्रस्तावों को मिली स्वीकृति

बैठक की शुरुआत राज्य स्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन-2025 (पुलिस मंथन) के सफल आयोजन और क्रियान्वयन को लेकर की गई। पुलिस महानिदेशक ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सम्मेलन की सफलता पर बधाई देते हुए बताया कि 11 सत्रों में रखे गए सभी प्रस्तावों और सुझावों को मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान सामने आए विचारों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

डीजीपी राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री की अपराध और अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश में चिन्हित अपराधियों, माफियाओं और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त, प्रभावी और निरंतर वैधानिक कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मिशन शक्ति कार्यक्रम की समीक्षा की

महिला सुरक्षा को लेकर चल रहे मिशन शक्ति कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से पूरे प्रदेश में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इन केंद्रों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से न केवल महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा का भाव बढ़ा है, बल्कि पुलिस की छवि में भी निरंतर सुधार हुआ है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि पूर्व समीक्षाओं के दौरान सामने आई लाभप्रद योजनाओं को सभी जनपदों और कमिश्नरेट में लागू कर मिशन शक्ति केंद्रों को और अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जनोपयोगी बनाया जाए।

मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए

सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे Zero Fatality District (ZFD) अभियान पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्रथम चरण में प्रदेश के 20 जनपदों में इस अभियान को लागू किया गया था, जिसके अच्छे और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इन्हीं सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस अभियान को द्वितीय चरण में प्रदेश के शेष सभी 55 जनपदों में लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि जागरूकता अभियानों, तकनीकी उपायों और सख्त प्रवर्तन के जरिए सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए।

‘यक्ष ऐप’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई

बैठक में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘यक्ष ऐप’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डीजीपी ने बताया कि अपराध और अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए पूर्व में संचालित ऑपरेशन पहचान, ऑपरेशन त्रिनेत्र, बीट प्रहरी जैसे अभियानों को यक्ष ऐप में समाहित किया गया है। इस ऐप के संचालन के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (SOP) पहले ही सभी इकाइयों को भेजी जा चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी SOP का अक्षरशः पालन करें और प्रथम चरण में यक्ष ऐप में फीड किए गए डाटा की आरक्षी स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक गहन जांच कराई जाए, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या कमी को समय रहते दूर किया जा सके।

तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए

डीजीपी ने बताया कि यक्ष ऐप में अपराधियों की पहचान के लिए AI आधारित फेसियल रिकग्निशन और AI आधारित वॉयस सर्च जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो अपराधों के अनावरण और भविष्य में उनकी रोकथाम में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐप के अधिकतम और प्रभावी उपयोग के लिए फील्ड स्तर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

अंत में पुलिस महानिदेशक ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि दिए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और जनसेवा के स्तर को निरंतर मजबूत किया जाए, ताकि आम जनता का पुलिस पर भरोसा और अधिक बढ़ सके।

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