एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने एक बड़ा नेटवर्क उजागर किया है। जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का मास्टरमाइंड तत्कालीन आयोग अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक महबूब अली था, जिसके तार कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों तक जुड़े होने की संभावना है।
गिरफ्तारी और चार्जशीट
एसटीएफ ने अब तक महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। हालांकि नए सुराग मिलने के कारण जांच अभी जारी है। सूत्रों के अनुसार महबूब अली के मोबाइल और डिजिटल डाटा की जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े अहम साक्ष्य मिले हैं। एक बड़े अफसर पर विशेष तौर पर शक जताया गया है। जिनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिलेंगे, उनके खिलाफ एसटीएफ कार्रवाई करेगी। दो से तीन और लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना है।
परीक्षा रद्द और सबूत मिटाने की कोशिश
इस मामले की परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित हुई थी। 20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने गोंडा स्थित लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उनके भाई विनय पाल और महबूब अली को गिरफ्तार किया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पेपर लीक के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की। जिन अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र की फोटोकॉपी दी गई थी, उन्हें वापस लेकर जला दिया गया ताकि कोई भौतिक प्रमाण न बचे। बावजूद इसके, मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एसटीएफ ने पूरे मामले का पर्दाफाश किया।
संवेदनशील जिम्मेदारी का दुरुपयोग
महबूब अली संविदा पर नियुक्त था, फिर भी उसे अत्यंत संकटग्रस्त जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उसने दुरुपयोग किया। इस पूरे प्रकरण के बाद तत्कालीन आयोग अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उनकी निगरानी की चूक के कारण ही परीक्षा रद्द करनी पड़ी। उनकी भूमिका की जांच भी जारी है।
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