एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ । यूपी के बलरामपुर में गोंडा रोड पर सोमवार देर शाम मामा के घर से लौट रही एक मूकबधिर युवती के साथ हुए दुष्कर्म ने कोतवाली देहात पुलिस की गश्त व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के समय संवेदनशील मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मी ड्यूटी पर होने के बावजूद सतर्कता नहीं बरत पाए। जांच में लापरवाही सामने आने पर एसपी ने एक उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी, दो आरक्षी और एक चालक होमगार्ड को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया।
आरोपियों ने इस तरह दिया वारदात को अंजाम
सोमवार शाम करीब छह बजे पीड़िता मामा के घर से पैदल अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान आरोपी अंकुर वर्मा अपने साथी हर्षित पांडेय के साथ बाइक पर आया। युवती को बाइक पर बैठाकर सुनसान इलाके में ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को मंगलवार देर रात मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया, लेकिन गश्त में चूक का मामला खुलकर सामने आ गया।
जांच में सामने आया सच
एसपी की जांच में स्पष्ट हुआ कि वारदात के समय रूट पर तैनात पीआरबी कर्मी, हल्का प्रभारी और बीट कांस्टेबल मौजूद थे, लेकिन उन्होंने सक्रिय गश्त नहीं की। इसके चलते आरोपी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। लापरवाही पर उपनिरीक्षक शिव कैलाश, मुख्य आरक्षी कमलेश प्रसाद, आरक्षी रजनीश कुमार, बीट आरक्षी सतीश चौरसिया और चालक होमगार्ड श्रीराम गुप्ता को लाइन हाजिर किया गया।
वारदात स्थल शाम ढलते ही हो जाता है सुनसान
वारदात स्थल का निरीक्षण करने पर पता चला कि गोंडा रोड का करीब तीन किलोमीटर लंबा हिस्सा शाम ढलते ही सुनसान हो जाता है। दोनों ओर खेत और झाड़ियां हैं, बीच-बीच में ट्रकों की आवाज के अलावा कोई हलचल नहीं होती। सड़क किनारे कुछ ठेलों की रोशनी के बाद पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात नौ बजे के बाद पुलिस गश्त बहुत कम दिखती है, और आपात स्थिति में मदद देर से मिलती है।
लाइन हाजिर का मतलब
लाइन हाजिर कोई वैधानिक दंड नहीं है, बल्कि एक प्रशासनिक आदेश है, जिसके तहत संबंधित कर्मियों को फील्ड ड्यूटी से हटाकर रिजर्व लाइन में भेजा जाता है ताकि उनके आचरण या शिकायत की निष्पक्ष जांच हो सके। पुलिस सेवा नियमों में यह चेतावनी, वेतन वृद्धि रोकना, पदावनति या निलंबन जैसे दंडों से अलग है और प्रायः अस्थायी अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में लागू होता है।
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