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मदद के लिए चीखती रही बेटी, भीड़ देखती रही तमाशा

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आगरा। शास्त्रीपुरम का व्यस्त चौराहा… सुबह के करीब साढ़े दस बजे का वक्त। सड़क पर लोगों की आवाजाही थी। दुकानें खुली थीं। कोई अपने दफ्तर जा रहा था तो कोई दुकान की ओर बढ़ रहा था। सब कुछ रोज की तरह सामान्य था, लेकिन इसी भीड़ के बीच एक बेटी की चीख ने इंसानियत को झकझोर दिया।

एक युवती अपनी स्कूटी से जा रही थी। तभी आरोप है कि ओमकार नाम के युवक ने अपने साथी के साथ बाइक आगे लगाकर उसका रास्ता रोक दिया। गाली-गलौज के बाद उसके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। लात-घूंसों से पीटने के बाद कथित तौर पर चाकू से भी हमला किया गया।

वह निहत्थी थी… अकेली थी… और मदद के लिए चीख रही थी।उसे उम्मीद थी कि आसपास खड़े लोगों में से कोई आगे आएगा। कोई हमलावर को रोकेगा। कोई उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आंखों में मदद की उम्मीद, सामने खड़ी रही भीड़

पीड़िता के मुताबिक, घटना के दौरान सड़क से कई लोग गुजर रहे थे। आसपास दुकानें भी खुली थीं। उसने लोगों की तरफ देखा, मदद की उम्मीद की, लेकिन कई लोग कथित तौर पर घटना देखकर भी वहां से निकल गए।घायल युवती के लिए सबसे दर्दनाक पल वह था, जब वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिरने लगी। वह बेहोशी की हालत में पहुंच रही थी, लेकिन उसके आसपास खड़े लोगों में से कोई आगे नहीं आया।

अपना दर्द बताते हुए युवती भावुक हो गई। उसकी आंखों में उस घटना का डर साफ दिखाई दिया। उसने कहा कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके साथ ऐसा हो सकता है। फिर उसका एक सवाल हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है—“मेरी जगह कल उनकी बेटी भी हो सकती है।”यह सिर्फ एक घायल युवती का सवाल नहीं है। यह उस समाज से सवाल है, जहां भीड़ मौजूद थी, लेकिन मदद के लिए हाथ बढ़ाने वाला कोई नहीं था।

दस दिन से पीछा करने का आरोप

पीड़िता का कहना है कि आरोपी करीब दस दिन से उसका पीछा कर रहा था। उसके मुताबिक, लगभग दस दिन पहले भी आरोपी उसके पास आया था और बातचीत करने का दबाव बनाया था। बात नहीं करने पर उसे कथित तौर पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी।

युवती ने यह बात अपने परिवार को नहीं बताई। उसे डर था कि कहीं परिजन उसकी पढ़ाई या नौकरी बंद न करा दें। उसने बताया कि करीब एक महीने पहले ही उसकी नौकरी लगी थी। वह नहीं चाहती थी कि डर की वजह से उसे कॉलेज और कंपनी जाना छोड़ना पड़े।शायद उसे भरोसा था कि बात यहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन आरोप है कि आरोपी उसका पीछा करता रहा और आखिरकार दिनदहाड़े उस पर हमला कर दिया।

परिजनों का सवाल- अगर भीड़ थी तो बेटी बची क्यों नहीं?

घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि मौके पर पुलिस मौजूद होती तो आरोपी को वहीं पकड़ा जा सकता था। राहगीरों ने 112 पर फोन किया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

परिजनों का सवाल है कि जब शहर के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और एंटी रोमियो टीमों की गश्त की बात कही जाती है, तो भीड़भाड़ वाले चौराहे पर ऐसी घटना कैसे हो गई?

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बीच उठे सुरक्षा पर सवाल

महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार पुलिस को मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया था।

इसके बावजूद शास्त्रीपुरम की यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं उठाती, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल छोड़ जाती है।क्योंकि उस वक्त वहां सिर्फ एक युवती नहीं थी…एक बेटी मदद मांग रही थी।और उसके आसपास खड़ी भीड़ में शायद हर कोई यह भूल गया था कि बेटियां किसी एक घर की नहीं होतीं।

हत्या के प्रयास में प्राथमिकी

मामले में हत्या के प्रयास की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजनों की ओर से दी गई तहरीर में एक आरोपी का नाम दर्ज कराया गया है। वहीं पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में मुख्य आरोपी के साथ एक अन्य युवक के मौजूद होने की बात कही है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है—क्या किसी बेटी के साथ सड़क पर ज्यादती होती रहे और समाज सिर्फ तमाशबीन बना रहे?शास्त्रीपुरम की उस सुबह की चीख शायद इस सवाल का जवाब मांग रही है।

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