नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज शनिवार से नई दिल्ली में होने जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस अहम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ साझेदार और विशेष रूप से आमंत्रित देशों के नेता भी हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाले सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर दिखाई देंगे।
यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा संकट और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सामना कर रही है। ऐसे में ब्रिक्स के मंच से वैश्विक शासन व्यवस्था, बहुपक्षवाद, आर्थिक सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है।
11 देशों के नेता होंगे शामिल
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मेजबान भारत के अलावा ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चीन, रूस, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात समेत ब्रिक्स से जुड़े देशों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। सऊदी अरब को भी आमंत्रित सदस्य के तौर पर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व व्यापार संगठन जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों और हस्तियों के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने और बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहने की संभावना है।
सात साल बाद दिल्ली आएंगे शी जिनपिंग
सम्मेलन के पहले दिन सबसे अहम घटनाक्रमों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दिल्ली यात्रा होगी। वह करीब सात साल बाद भारत की राजधानी पहुंचेंगे। ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत की भी योजना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत पर भी सभी की नजर रहेगी। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बनाएगी।
आज का कार्यक्रम
शनिवार को दोपहर करीब 12:30 बजे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है। इसके बाद दोपहर 2:35 बजे ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे में बैठक शुरू होगी। इस बैठक में समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
शाम 4:25 बजे ब्रिक्स नेता ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। इसके बाद शाम 5:05 बजे सामूहिक फोटो सत्र और संयुक्त पौधरोपण का कार्यक्रम होगा।
दिन के कार्यक्रमों का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज के साथ होगा। रात्रिभोज का आयोजन शाम करीब 7:30 बजे प्रस्तावित है।
13 सितंबर को मुख्य सत्र और दिल्ली घोषणापत्र
सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन 13 सितंबर को सदस्य देशों, साझेदार देशों तथा विशेष रूप से आमंत्रित देशों के नेताओं का आगमन सुबह 9:55 बजे से शुरू होगा।
इसके बाद सुबह 10:35 बजे आधिकारिक सामूहिक फोटो सत्र आयोजित किया जाएगा। सुबह 10:50 बजे सम्मेलन का मुख्य खुला सत्र शुरू होगा। इस सत्र की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना’ रखी गई है।
इस सत्र में वैश्विक विकास, आर्थिक सहयोग, नवाचार, स्थिरता और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से निपटने के लिए साझा रणनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
सम्मेलन के समापन पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया जाएगा। इसी के साथ दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का औपचारिक समापन होगा।
चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत वर्ष 2012, 2016 और 2021 में तीन बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। अब 1 जनवरी 2026 से भारत ने चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता संभाली है।
वर्ष 2026 ब्रिक्स के लिए भी खास है, क्योंकि इस समूह के गठन को 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन संगठन की आगे की दिशा और वैश्विक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए तैयार किए गए लोगो में परंपरा और आधुनिकता का मेल दिखाई देता है। इसकी पंखुड़ियों में ब्रिक्स देशों के जीवंत रंगों को शामिल किया गया है, जो समूह की सामूहिक शक्ति और एकता का प्रतीक हैं। लोगो के केंद्र में ‘नमस्ते’ की मुद्रा भारत की गर्मजोशी, सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाती है।
ट्रंप की नीतियों और अमेरिकी टैरिफ पर भी रहेगी नजर
ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे अंतरराष्ट्रीय माहौल में हो रहा है, जब अमेरिका की नीतियों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियां और विभिन्न देशों पर लगाए जा रहे टैरिफ दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।
इसके अलावा ईरान से जुड़ा सैन्य तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बढ़ाई हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ-साथ उसके विरोधी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।
ऐसे समय में ब्रिक्स देशों की बैठक को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है। सम्मेलन में व्यापार, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, बहुपक्षीय व्यवस्था और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
ब्रिक्स का विस्तार भी समूह के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाला हो सकता है, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका को भी स्पष्ट कर सकता है।
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