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पिता को कैंसर से पीड़ित देख मधुकांत वशिष्ठ ने शुरू किया शोध

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मधुसूदन ने कोरोना वायरस की एंटी-वायरल दवा पर किया अध्ययन

चन्दौसी। किसी गंभीर बीमारी से अपने किसी करीबी को जूझते देख व्यक्ति के मन में उस बीमारी के उपचार को लेकर कुछ नया करने का संकल्प पैदा हो सकता है। इसी प्रेरणा को वैज्ञानिक शोध की दिशा में आगे बढ़ाते हुए मधुकांत वशिष्ठ ने अपने पिता को कैंसर से पीड़ित देखने के बाद कैंसर एवं औषधीय अनुसंधान के क्षेत्र में शोध शुरू किया। वहीं मधुसूदन ने कोरोना वायरस के विरुद्ध संभावित एंटी-वायरल दवा/यौगिक की खोज से संबंधित विषय पर शोध कार्य करते हुए अपने प्री-पीएच.डी. शोध प्रस्तुतीकरण में शोध की दिशा और संभावनाओं को सामने रखा।

श्यामसुंदर मेमोरियल पीजी कॉलेज, चन्दौसी के रसायन विज्ञान विभाग में 12 अगस्त 2026 को प्री-पीएच.डी. शोध प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शोधार्थी मधुकांत वशिष्ठ एवं मधुसूदन ने अपने-अपने शोध विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। दोनों शोधार्थियों ने अपने शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, शोध पद्धति एवं संभावित उपयोगिता के बारे में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं को जानकारी दी।

पिता की बीमारी बनी मधुकांत वशिष्ठ के शोध की प्रेरणा

मधुकांत वशिष्ठ के शोध के पीछे उनके जीवन से जुड़ा भावनात्मक अनुभव है। उन्होंने अपने पिता को कैंसर से पीड़ित देखा। बीमारी के दौरान परिवार पर पड़े प्रभाव और उपचार से जुड़ी चुनौतियों ने उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान की ओर प्रेरित किया। उन्होंने संकल्प लिया कि विज्ञान के क्षेत्र में रहते हुए ऐसी दिशा में शोध किया जाए, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए उपयोगी यौगिकों की खोज में सहायता मिल सके।

मधुकांत वशिष्ठ का शोध विषय “Synthesis and Docking of Nitrogenous Base Containing Nucleosides and Evaluation of Their Biological Activity” है। इस शोध में नाइट्रोजनयुक्त बेस युक्त न्यूक्लियोसाइड्स के संश्लेषण, डॉकिन्ग अध्ययन तथा उनकी जैविक गतिविधियों के मूल्यांकन से संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। शोध के माध्यम से ऐसे यौगिकों के अध्ययन की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिनकी भविष्य में औषधीय एवं कैंसररोधी (Anti-cancer) अनुसंधान में उपयोगिता का परीक्षण किया जा सके।

प्री-पीएच.डी. प्रस्तुतीकरण के दौरान मधुकांत वशिष्ठ ने अपने शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य और शोध कार्य की दिशा को विस्तार से प्रस्तुत किया। उपस्थित शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने शोध विषय से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने संतोषजनक उत्तर दिया।

मधुसूदन ने कोरोना वायरस के लिए एंटी-वायरल दवा पर किया शोध

कार्यक्रम में दूसरे शोधार्थी मधुसूदन ने कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के विरुद्ध संभावित एंटी-वायरल दवा/यौगिक की पहचान से संबंधित अपने शोध विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया।

मधुसूदन का शोध विषय “In Silico Study of Substituted Oxadiazole Nucleosides to Identify a New Anti-viral Compound against SARS-CoV-2” है। इस शोध में In Silico तकनीकों के माध्यम से Substituted Oxadiazole Nucleosides का अध्ययन करते हुए SARS-CoV-2 के विरुद्ध संभावित नए एंटी-वायरल यौगिक की पहचान की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मधुसूदन ने अपने शोध प्रस्तुतीकरण में शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, कंप्यूटेशनल अध्ययन की प्रक्रिया तथा संभावित एंटी-वायरल यौगिक की पहचान से संबंधित शोध की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रस्तुतीकरण के दौरान उपस्थित शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने संतोषजनक उत्तर दिया।

दोनों शोधार्थियों के शोध कार्य पर हुई चर्चा

प्री-पीएच.डी. प्रस्तुतीकरण के दौरान दोनों शोधार्थियों के शोध कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने शोध की प्रासंगिकता, शोध पद्धति, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भविष्य में इसके संभावित विस्तार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए।

दोनों शोधार्थियों ने पूछे गए प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देते हुए अपने-अपने शोध की दिशा को स्पष्ट किया। प्रस्तुतीकरण के उपरांत दोनों शोध कार्यों को संतोषजनक एवं मूल्यांकन के योग्य पाया गया तथा शोध प्रबंधों को आगे की प्रक्रिया के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली में जमा करने की संस्तुति की गई।

कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) दानवीर सिंह यादव, प्राचार्य एवं शोध पर्यवेक्षक, के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर रसायन विज्ञान विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

मधुकांत वशिष्ठ के लिए यह शोध यात्रा जहां पिता की कैंसर बीमारी से मिली प्रेरणा को वैज्ञानिक अनुसंधान में बदलने का उदाहरण है, वहीं मधुसूदन का शोध कोरोना वायरस के विरुद्ध संभावित एंटी-वायरल यौगिक की खोज की दिशा में आधुनिक वैज्ञानिक एवं कंप्यूटेशनल तकनीकों के प्रयोग को दर्शाता है। दोनों शोधार्थियों के प्रयासों की उपस्थित शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने सराहना की और उन्हें भविष्य के शोध कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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