नई दिल्ली । दिल्ली दंगों और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों के ट्रायल में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बड़ा बयान दिया है।
यूएपीए मामले पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत
चीफ जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह संस्थान के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी। किसी खास मामले या आरोपी का जिक्र किए बिना, सीजेआई ने कहा कि यूएपीए एक ऐसा मामला है जिस पर न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है।
मामलों का शीघ्र निपटारा ही विवाद का प्रभावी समाधान-सीजेआई
देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्सर ही सवाल उठते रहते हैं। खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं। इन सबके बीच सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है।
विशेष अदालतों से बढ़ी उम्मीदें
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है।
जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
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