गाजियाबाद। 11वीं के छात्र सूर्या चौहान की निर्मम हत्या से पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाले मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हत्या के आरोपी असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उसके परिजन शव को पैतृक गांव महुआखेड़ा ले जाकर दफनाना चाहते थे, लेकिन ग्रामीणों के तीखे विरोध के चलते उन्हें अपने इरादे बदलने पड़े। हालात ऐसे बने कि असद का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में नहीं हो सका और परिजनों को गाजियाबाद में ही उसे दफनाना पड़ा।
गांव पहुंचने से पहले ही शुरू हुआ विरोध
बताया जा रहा है कि जैसे ही ग्रामीणों को सूचना मिली कि सूर्या हत्याकांड के आरोपी असद का शव गांव लाया जा सकता है, गांव में विरोध के स्वर तेज हो गए। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जिस युवक पर एक मासूम छात्र की हत्या का आरोप है, उसे गांव में दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बढ़ते विरोध को देखते हुए परिजनों ने गांव में अंतिम संस्कार का फैसला छोड़ दिया।
चाचा ने भी जताया दुख, बोले- जो किया उसकी सजा मिल गई
मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपी के अपने परिजनों ने भी उसके कृत्य को गलत ठहराया। असद के चाचा आबिद ने कहा कि अगर कोई विवाद था तो उसे बातचीत से सुलझाया जा सकता था। हत्या जैसा कदम किसी भी हालत में सही नहीं था।उन्होंने कहा, “असद ने जो किया वह गलत था। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। ऊपर वाले ने उसे उसके कर्मों की सजा दे दी।”
20 साल पहले छोड़ दिया था गांव
ग्रामीणों के मुताबिक असद का परिवार करीब दो दशक पहले गांव महुआखेड़ा छोड़कर गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में बस गया था। बावजूद इसके, परिजन पैतृक गांव में ही अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन गांव वालों के विरोध के आगे उनकी एक नहीं चली।
सूर्या हत्याकांड के बाद उबाल पर जनाक्रोश
सूर्या चौहान की हत्या के बाद से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। घटना को लेकर लोगों में गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ है। यही वजह रही कि आरोपी के अंतिम संस्कार को लेकर भी गांव में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
यह भी पढ़े : यूपी में स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला, उपभोक्ता खुद तय करेंगे प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर

