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एआईपीईएफ ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के संघर्ष को दिया राष्ट्रीय समर्थन

इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ । ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन की संघीय कार्यकारिणी की 12 जून 2026 को बेंगलुरु में सम्पन्न बैठक में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के संघर्ष तथा प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 के विरुद्ध महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। संघर्ष समिति ने एआईपीईएफ द्वारा उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के संघर्ष को दिए गए पूर्ण समर्थन का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे प्रदेश के बिजली कर्मियों का मनोबल और अधिक मजबूत हुआ है।

अभियंता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे

एआईपीईएफ ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरुद्ध पिछले 562 दिनों से बिजली कर्मी एवं अभियंता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली पंचायतों, बिजली महापंचायतों, विशाल रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से यह आंदोलन अब व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें आम उपभोक्ता भी बड़ी संख्या में भागीदारी कर रहे हैं।

उत्पीड़न समाप्त करने संबंधी सभी निर्देशों को अक्षरशः लागू किया जाए

एआईपीईएफ ने आंदोलन के दौरान हजारों कर्मचारियों के स्थानांतरण, संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त किए जाने, अनुशासनात्मक नियमों में मनमाने संशोधन, बिना आरोप पत्र एवं बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा से पृथक करने जैसी कार्यवाहियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रयास बताया है।

एआईपीईएफ ने मांग की है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए तथा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों और अभियंताओं के विरुद्ध की गई सभी दमनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां बिना शर्त समाप्त की जाएं। साथ ही 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के मध्य हुए समझौते के अनुरूप उत्पीड़न समाप्त करने संबंधी सभी निर्देशों को अक्षरशः लागू किया जाए।

प्रावधान अंततः वितरण क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे

एआईपीईएफ ने स्पष्ट घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला पूरे देश के बिजली कर्मियों पर हमला माना जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता उत्तर प्रदेश के संघर्ष के समर्थन में एकजुट होकर राष्ट्रीय आंदोलन चलाएंगे।बैठक में पारित दूसरे महत्वपूर्ण प्रस्ताव में एआईपीईएफ ने प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 का कड़ा विरोध करते हुए इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देने वाला विधेयक बताया है।

एआईपीईएफ ने कहा है कि यह विधेयक सार्वजनिक वितरण कंपनियों को कमजोर कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का माध्यम बनेगा। समान क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देने, लाभकारी उपभोक्ताओं की चुनिंदा आपूर्ति (Cherry Picking) तथा सार्वजनिक वितरण कंपनियों की आय के स्रोतों को कमजोर करने के प्रावधान अंततः वितरण क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

कमजोर वर्गों को मिलने वाली सस्ती बिजली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा

एआईपीईएफ ने यह भी कहा कि इस विधेयक से घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों तथा समाज के कमजोर वर्गों को मिलने वाली सस्ती बिजली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था कमजोर होगी और सार्वजनिक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

संघीय कार्यकारिणी ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी मानसून सत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया गया तो एआईपीईएफ राष्ट्रीय समन्वय समिति (NCCOEEE) तथा अन्य संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम चलाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अल्प सूचना पर राष्ट्रव्यापी “लाइटनिंग स्ट्राइक” सहित सभी प्रकार के आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

संघर्ष केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रह गया

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि एआईपीईएफ द्वारा पारित दोनों प्रस्ताव यह स्पष्ट करते हैं कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण के विरुद्ध चल रहा संघर्ष केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह देश के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, उपभोक्ताओं, किसानों तथा बिजली कर्मियों के हितों की रक्षा का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार एवं ऊर्जा निगम प्रबंधन से पुनः अपील की है कि निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस लेकर संवाद एवं समाधान का मार्ग अपनाया जाए तथा सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर बिजली कर्मियों के साथ विश्वास का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

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