आगरा। यूपी के आगरा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। फ्रीगंज में नाले से नवजात का शव मिलने की घटना के 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि अब ग्राम चितौरा में एक और खौफनाक तस्वीर सामने आ गई—जहां एक नवजात शिशु को झाड़ियों और कांटों के बीच मरने के लिए छोड़ दिया गया।

खेतों में गूंजी मासूम की सिसकियां

मंगलवार को चितौरा गांव में लाखन सिंह के खेत में मजदूर खरबूजे की फसल तोड़ रहे थे। तभी अचानक उन्हें किसी बच्चे के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। पहले तो किसी को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब मजदूर आवाज की दिशा में आगे बढ़े, तो जो दृश्य सामने आया, उसे देखकर हर कोई सन्न रह गया।झाड़ियों और कांटों के बीच एक नवजात शिशु पॉलिथीन में लिपटा पड़ा था। उसके शरीर पर मिट्टी लगी हुई थी और चींटियां उसे नोच रही थीं। मासूम की हल्की-हल्की सिसकियां ही उसकी जिंदा होने की गवाही दे रही थीं।

महिला ने दिखाई ममता, बचाई जान

सूचना मिलते ही ग्रामीण महिला नीतू देवी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना देर किए मासूम को अपनी गोद में उठा लिया, उसे साफ किया और तुरंत शमसाबाद थाने पहुंचीं। वहां से पुलिस और बाल कल्याण अधिकारी योगेश कन्नौजिया के साथ बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

हालत गंभीर, वार्मर पर रखा गया नवजात

सीएचसी में डॉक्टर मृदुल शर्मा ने बच्चे की जांच की। डॉक्टर के अनुसार, नवजात का वजन काफी कम है और उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसे तुरंत वार्मर मशीन में रखा गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर कर दिया गया है।

अस्पताल में उमड़ा गुस्सा, मां पर उठे सवाल

जैसे ही इस घटना की खबर फैली, अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई उस मां को कोसता नजर आया, जिसने अपने ही जिगर के टुकड़े को इस तरह मौत के मुंह में छोड़ दिया।पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर यह नवजात किसका है और उसे इस हालत में खेतों में कौन छोड़कर गया। आसपास के इलाकों में पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

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