लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्पादन निगम की पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव को निजी कंपनियों को सौंपने के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मियों में तीव्र आक्रोश देखने को मिल रहा है।

निगम को भी निजी हाथों में देने की तैयारी की जा रही

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने इस निर्णय को “सुनियोजित निजीकरण” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल के नेतृत्व में पहले वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया चलाई गई और अब उत्पादन निगम को भी निजी हाथों में देने की तैयारी की जा रही है।

पनकी ताप विद्युत परियोजना में करीब 100 इंजीनियर

संघर्ष समिति के मुताबिक, पनकी ताप विद्युत परियोजना में करीब 100 इंजीनियर, 75 जूनियर इंजीनियर, 75 टेक्नीशियन और 245 अन्य नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 500 से अधिक संविदा कर्मी भी जुड़े हैं। वहीं, जवाहरपुर परियोजना में 150 इंजीनियर, 90 जूनियर इंजीनियर, 100 टेक्नीशियन और 135 अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। दोनों परियोजनाओं को मिलाकर लगभग 2000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।

इन्हें निजी हाथों में देना जनता के साथ विश्वासघात होगा

समिति ने आरोप लगाया कि लाभकारी उत्पादन इकाइयों को 25 वर्षों के लिए “यूनिफाइड टेंडर” के जरिए निजी कंपनियों को सौंपना सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने की साजिश है। उनका कहना है कि ये परियोजनाएं जनता के कर के पैसे से बनी हैं और इन्हें निजी हाथों में देना जनता के साथ विश्वासघात होगा।बिजली कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि निजीकरण लागू करने के लिए कर्मचारियों पर दबाव और उत्पीड़न का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे कार्यसंस्कृति प्रभावित हो रही है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि मार्च 2023 से अब तक कर्मचारियों के खिलाफ की गई सभी कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए।

प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन

निजीकरण के विरोध में संघर्ष समिति ने प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान छेड़ दिया है। इसी क्रम में संभल और रामपुर में विरोध सभाएं आयोजित की गईं, जहां नेताओं ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।

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