कानपुर । कानपुर के किदवईनगर स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में जो हुआ, वह सिर्फ एक हत्याकांड नहीं… बल्कि रिश्तों, भरोसे और इंसानियत की सबसे दर्दनाक हार है।11 साल की जुड़वां बहनें—रिद्धि और सिद्धि… एक ही चेहरे की दो मुस्कानें, एक ही घर की दो खुशियां। स्कूल, खेल, हंसी… और “पापा” के इर्द-गिर्द घूमती उनकी छोटी सी दुनिया। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसी दुनिया के केंद्र में खड़ा इंसान एक दिन उनका अंत लिख देगा।
कैसे रची गई साजिश?
पुलिस जांच में जो सच सामने आया, उसने हर किसी को अंदर तक हिला दिया। यह कोई गुस्से में किया गया अपराध नहीं था… बल्कि पूरी तरह से सोची-समझी साजिश थी। आरोपी पिता शशिरंजन मिश्रा ने घटना से करीब पांच दिन पहले ही हत्या में इस्तेमाल होने वाला चापड़ खरीद लिया था।वारदात वाली रात… उसने अपनी ही बेटियों को नशीला पदार्थ दिया। मासूम बच्चियां… जिन्हें लगा होगा कि पापा कुछ खिला रहे हैं… वे धीरे-धीरे बेसुध हो गईं। शायद उन्हें आखिरी पल तक अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ क्या होने वाला है।
खौफनाक मंजर जिसने सबको झकझोर दिया
जब बच्चियां बेहोशी की हालत में पहुंच गईं, तब शुरू हुआ वो मंजर जिसे सोचकर भी रूह कांप उठती है।आरोपी ने एक-एक कर दोनों बेटियों के गले पर चापड़ रखा और हथौड़े से वार किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के गले पर करीब 12 सेंटीमीटर गहरा घाव मिला।डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर पर और कोई चोट नहीं थी… यानी बच्चियां प्रतिरोध तक नहीं कर सकीं। नशीली दवा ने उन्हें इतना कमजोर कर दिया था कि वे अपनी जान भी नहीं बचा सकीं।
सीसीटीवी में कैद सच… बच नहीं पाएगा आरोपी
इस पूरे हत्याकांड का सबसे मजबूत सबूत है—कमरे में लगा सीसीटीवी कैमरा।फुटेज में आरोपी की हर हरकत, हर पल रिकॉर्ड है। यही नहीं, फॉरेंसिक जांच में उसके हाथों और कपड़ों पर बच्चियों का खून भी मिला है।पुलिस अब गवाहों के बयान, तकनीकी साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जोड़कर मजबूत चार्जशीट तैयार कर रही है, ताकि अदालत में आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
पत्नी के खुलासे—घर के अंदर का अंधेरा
आरोपी की पत्नी रेशमा के बयान ने इस कहानी का दूसरा डरावना पहलू सामने रखा।उन्होंने बताया कि शशिरंजन लंबे समय से शराब और नशे का आदी था। घर में आए दिन झगड़े, मारपीट और तनाव का माहौल रहता था।लेकिन शायद उन्होंने भी नहीं सोचा था कि यह अंधेरा एक दिन इतनी भयानक वारदात में बदल जाएगा… जहां एक पिता अपनी ही बेटियों का कातिल बन जाएगा।
सबसे दर्दनाक सवाल… जिसका जवाब नहीं
वारदात के डेढ़ घंटे बाद आरोपी ने खुद पुलिस को फोन कर सूचना दी—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
यह वही इंसान था, जिसे उसकी बेटियां “पापा” कहकर पुकारती थीं…
आज उस घर में सन्नाटा है… दीवारें गवाह हैं उस चीख की, जो कभी बाहर नहीं आ पाई।
रिद्धि और सिद्धि अब इस दुनिया में नहीं हैं… लेकिन उनका एक सवाल हर दिल को चीर देता है—
“क्या हमारा कसूर सिर्फ इतना था कि हम तुम्हारी बेटियां थीं?”
यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं
यह कहानी है उस भरोसे के टूटने की, जो सबसे पवित्र रिश्ते में होता है—पिता और बेटी का रिश्ता।
