लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रदेश की कृषि प्रगति पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है और इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।
विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई
होटल सेंट्रम में आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादन और विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीतियों और केंद्र व राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों के कारण यह परिवर्तन संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि “लैब टू लैंड” की अवधारणा अब जमीन पर उतर चुकी है, जिससे शोध और तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंच रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बहुफसली खेती को बढ़ावा मिला है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। साथ ही वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में सुधार हो रहा है।
कृषि विकास को नई दिशा दी जा रही
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के सशक्तीकरण और अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्रों की स्थापना को इस बदलाव का महत्वपूर्ण आधार बताया।उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल 69 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय थे, लेकिन अब सभी केंद्र पूरी तरह कार्यरत हैं और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदेश के नौ एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कर कृषि विकास को नई दिशा दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कृषि वैज्ञानिक सीधे खेतों में जाकर किसानों को नई तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की कृषि विकास दर लगभग 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
कृषि को वैल्यू एडिशन से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया
उन्होंने कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इससे आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है। साथ ही कृषि को वैल्यू एडिशन से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया।मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वाराणसी में इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट की स्थापना जैसे कदमों से किसानों को नई तकनीक और उन्नत बीज मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन 100 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पहले 50–60 कुंतल तक सीमित था।
वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बेहतर उत्पादन संभव
इस दौरान उन्होंने बाराबंकी के प्रगतिशील किसान पद्म सम्मानित रामशरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में भी वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बेहतर उत्पादन संभव है।मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन चावल और 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। तिलहन और सब्जियों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार और सहयोग पर अपने विचार साझा किए।
