कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में बुधवार को भारी मतदान दर्ज किया गया। छिटपुट हिंसा, ईवीएम में तकनीकी खराबी और राजनीतिक तनातनी के बीच भी मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला और कुल 91.41 प्रतिशत मतदान हुआ। सात जिलों की 142 सीटों पर हुए इस मतदान के साथ ही 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। अब 4 मई को मतगणना के बाद यह साफ होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
मतदान में शुरुआती घंटों से ही तेज रफ्तार रही
निर्वाचन आयोग के मुताबिक सुबह 7 बजे शुरू हुए मतदान में शुरुआती घंटों से ही तेज रफ्तार रही। सुबह 9 बजे तक करीब 18 प्रतिशत, 11 बजे तक 39.97 प्रतिशत, दोपहर 1 बजे तक 61.11 प्रतिशत और 3 बजे तक 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ा 91.41 प्रतिशत पर पहुंचा। पूर्व बर्धमान जिले में सबसे अधिक 93.39 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कोलकाता दक्षिण में सबसे कम 87.25 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
सबसे अधिक सुरक्षा बल कोलकाता में तैनात किए गए
इस चरण में राजधानी कोलकाता समेत हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली, नदिया और पूर्व बर्धमान जिलों की सीटों पर मतदान हुआ। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। केंद्रीय बलों की 2,231 कंपनियां, यानी दो लाख से अधिक जवान, और करीब 40 हजार पुलिसकर्मी पूरे दिन मुस्तैद रहे। सबसे अधिक सुरक्षा बल कोलकाता में तैनात किए गए।
बावजूद कई स्थानों से झड़प और तनाव की खबरें सामने आईं
हालांकि कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद कई स्थानों से झड़प और तनाव की खबरें सामने आईं। नदिया जिले के चापड़ा में भाजपा एजेंट पर हमले का आरोप लगा, जबकि भवानीपुर और कालीघाट में भाजपा और तृणमूल समर्थकों के बीच तीखी नारेबाजी हुई। हालात बिगड़ने पर कुछ जगहों पर केंद्रीय बलों को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला चर्चा का केंद्र रहा। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। ममता बनर्जी ने बाहरी पर्यवेक्षकों पर सवाल उठाए, वहीं शुभेंदु अधिकारी ने उनकी हार का दावा किया।
ईवीएम खराब होने पर लोगों ने प्रदर्शन किया
कई जगहों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी भी सामने आई, जिससे मतदान कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हावड़ा के लिलुआ क्षेत्र में ईवीएम खराब होने पर लोगों ने प्रदर्शन किया, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं, वोट देने आए एक बुजुर्ग की मौत की घटना ने भी माहौल को संवेदनशील बना दिया।इसके बावजूद चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया। पहले चरण में भी 93 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था, जिससे यह चुनाव रिकॉर्ड वोटिंग के लिए चर्चा में है।अब सभी की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद यह तय होगा कि पश्चिम बंगाल में सत्ता की कुर्सी किसके हिस्से में जाएगी।
