लखनऊ । यूपी के मिर्जापुर की ड्रमंडगंज घाटी बुधवार रात एक बार फिर चीखों और आग की लपटों से दहशत में डूब गई। यह वही घाटी है, जहां सड़कें तो हैं, लेकिन सुरक्षा के सवाल हर बार खड़े हो जाते हैं।बुधवार की रात करीब 8 बजे एक खुशहाल परिवार अपने 9 साल के बेटे का मुंडन संस्कार कराकर मैहर से लौट रहा था। गाड़ी में हंसी-खुशी का माहौल था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि कुछ ही पलों में यह सफर मौत में बदल जाएगा।

गिट्टी लदा ट्रेलर अचानक बेकाबू हो गया

जैसे ही बोलेरो ड्रमंडगंज घाटी के खतरनाक मोड़ पर पहुंची, सामने से आ रहा गिट्टी लदा ट्रेलर अचानक बेकाबू हो गया। बताया जा रहा है कि ट्रेलर का ब्रेक फेल हो गया था। उसने पहले स्विफ्ट कार को जोरदार टक्कर मारी, फिर एक ट्रक से भिड़ गया। इसी दौरान पीछे से आ रही बोलेरो भी टकरा गई।टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो में धमाके के साथ आग लग गई। कुछ ही सेकंड में पूरी गाड़ी आग के गोले में बदल गई। अंदर बैठे लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन दरवाजे जाम हो चुके थे… आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

आग इतनी भयंकर थी कि पास जाना भी मुश्किल था

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, “हमने लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि पास जाना भी मुश्किल था… चीखें सुनाई दे रही थीं, लेकिन हम कुछ नहीं कर सके…”बोलेरो में सवार 9 लोग जिंदा जल गए। इनमें महिलाएं, बच्चे और परिवार के सदस्य शामिल थे। जिस बच्चे का मुंडन कराकर परिवार लौट रहा था, वह भी इस हादसे का शिकार हो गया।इस हादसे में स्विफ्ट कार चालक जयप्रकाश (26), निवासी सोनभद्र की भी जान चली गई, जबकि ट्रक का खलासी इलाज के दौरान दम तोड़ गया। इस तरह कुल 11 लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।

राहत-बचाव और प्रशासनिक कार्रवाई

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। बोलेरो राख में बदल चुकी थी और अंदर फंसे लोग जिंदगी की जंग हार चुके थे।जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और परिजनों को सूचना दी जा रही है।

खतरनाक सड़क या लापरवाही

ड्रमंडगंज घाटी लंबे समय से हादसों के लिए कुख्यात रही है। यहां के तीखे मोड़, ढलान और खराब सड़क डिजाइन पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुधार किए गए होते, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टल सकती थी।

पीएम ने जताया शोक

नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।

अंतिम तस्वीर

एक तरफ घर में जश्न की तैयारी थी… मुंडन के बाद खुशियां मनाने की उम्मीद थी…

लेकिन अब उसी घर में सन्नाटा है, चीखें हैं, और आंखों में आंसू हैं।

ड्रमंडगंज घाटी ने एक बार फिर साबित कर दिया—यह रास्ता सिर्फ दूरी नहीं, कई जिंदगियां भी निगल रहा है।

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