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बरेली के होनहारों का जलवा, मां, किसान के बेटे और संविदा कर्मी ने PCS में लिखी सफलता की कहानी

बरेली। जब हालात मुश्किल हों, जिम्मेदारियां भारी हों और रास्ता अनिश्चित हो—तब जो लोग अपने सपनों को थामे रखते हैं, वही इतिहास लिखते हैं। यूपी पीसीएस-2024 के परिणाम में बरेली के कई ऐसे होनहार सामने आए हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

दो बच्चों की मां पहले प्रयास में बनीं तहसीलदार

दुर्गा नगर की 34 वर्षीय आकांक्षा सक्सेना की कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो शादी और परिवार के बाद अपने सपनों को पीछे छोड़ देती है। 18 साल की उम्र में शादी, फिर पढ़ाई, दो बच्चों की जिम्मेदारी और 2013 की केदारनाथ त्रासदी में ससुर का लापता होना—इन सबके बावजूद आकांक्षा ने हार नहीं मानी। बिना किसी कोचिंग के, सिर्फ यूट्यूब के सहारे पढ़ाई कर उन्होंने पहले ही प्रयास में नायब तहसीलदार बनकर दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

शैलेंद्र कुमार ने भी संघर्ष की नई कहानी लिखी

वहीं, गांव गुलड़िया अरिल के किसान परिवार से आने वाले शैलेंद्र कुमार ने भी संघर्ष की नई कहानी लिखी। सीमित संसाधनों में पढ़ाई करते हुए उन्होंने पहले ही प्रयास में असिस्टेंट कमिश्नर (वाणिज्य कर) का पद हासिल किया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि गांव की मिट्टी से भी बड़े सपने जन्म लेते हैं और पूरे भी होते हैं।42 वर्षीय सुरेश बाबू की कहानी धैर्य और दृढ़ता की मिसाल है। संविदा कर्मचारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। कोरोना काल में भाई की मृत्यु जैसी बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उनकी यह सफलता बताती है कि उम्र कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

निरंतर प्रयास से पाई जा सकती है सफलता

उपासना मार्छाल और कुशाग्र प्रकाश जैसे युवाओं ने भी यह दिखाया कि सही दिशा और निरंतर प्रयास से सफलता पाई जा सकती है। बिना कोचिंग या सीमित संसाधनों में तैयारी कर उन्होंने अपने सपनों को हकीकत में बदला।इन सभी कहानियों में एक बात समान है—संघर्ष, मेहनत और हार न मानने का जज्बा। बरेली के इन होनहारों ने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो सफलता जरूर मिलती है।ये सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि हर उस युवा के लिए संदेश है जो अपने सपनों को सच करने की राह पर है—अगर ठान लो, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं।”

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