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बिगड़ती बिजली व्यवस्था पर संघर्ष समिति का अल्टीमेटम, 13 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध का ऐलान

लखनऊ।त्तर प्रदेश में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सार्थक वार्ता नहीं की गई, तो मौजूदा अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन को उठानी होगी।

प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराती जा रही

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि प्रबंधन की नीतिगत खामियों और जमीनी हकीकत से दूर फैसलों के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराती जा रही है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें लगातार बिजली कटौती और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में टकराव की बजाय संवाद और समाधान की आवश्यकता है।

चेयरमैन संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाएं

समिति ने मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन तत्काल संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाएं। साथ ही, बिजली कर्मियों के खिलाफ चल रही उत्पीड़नात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त कर पूर्व में की गई सभी कार्रवाइयों को वापस लिया जाए, ताकि सामान्य कार्य वातावरण बहाल हो सके।

निजीकरण के खिलाफ सख्त रुख

संघर्ष समिति ने पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण के निजीकरण की प्रक्रिया को जनविरोधी करार दिया है। समिति का कहना है कि ये परियोजनाएं लगातार लाभ में हैं और बेहतर उत्पादन का रिकॉर्ड रखती हैं, ऐसे में इन्हें निजी हाथों में सौंपना जनता के संसाधनों की खुली लूट के समान है।

समिति के अनुसार, पनकी ताप बिजली घर पर लगभग 8000 करोड़ रुपये और जवाहरपुर परियोजना पर करीब 14,000 करोड़ रुपये की भारी सार्वजनिक धनराशि खर्च की गई है। इसके बावजूद इन्हें 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है।

13 मई को प्रदेशव्यापी विरोध

संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि यदि टेंडर प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी, अभियंता और जूनियर इंजीनियर काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे और कार्यालय समय के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

स्मार्ट मीटर और बढ़ती समस्याएं

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर का नियंत्रण निजी कंपनियों को दिए जाने के बाद उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ी हैं और बिजली व्यवस्था में असंतुलन पैदा हुआ है।

जन-जागरण अभियान जारी

निजीकरण के विरोध में संघर्ष समिति द्वारा प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में उरई, झांसी और पारीछा ताप बिजली परियोजनाओं में विरोध सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर और महेंद्र राय ने कर्मचारियों को संबोधित किया।समिति ने दोहराया कि बिजली कर्मी हमेशा उपभोक्ताओं के हित में काम करते रहे हैं और आगे भी उन्हें किसी तरह की असुविधा नहीं होने देंगे, लेकिन इसके लिए प्रबंधन का सहयोग और सकारात्मक रवैया बेहद जरूरी है।

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