भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने घोषित किए नाम; दो महिला प्रत्याशियों को भी मिला मौका
कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह से लेकर राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति तक मैदान में; 16 अक्टूबर को होगा मतदान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा सियासी दांव खेलते हुए आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने इस बार जहां कई नए चेहरों पर भरोसा जताया है, वहीं सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की भी कोशिश की है। खास बात यह है कि भाजपा की सूची में दो महिलाओं को जगह मिली है। बरेली के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाना इस सूची का सबसे चर्चित फैसला माना जा रहा है।
भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है।
नए चेहरों के सहारे सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
भाजपा की उम्मीदवार सूची में सामाजिक समीकरणों की साफ झलक दिखाई देती है। पार्टी ने ओबीसी, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हुए अलग-अलग जातीय समूहों को साधने की कोशिश की है। सूची में लोधी, पाल और कुर्मी समाज से जुड़े चेहरों के साथ दलित और सवर्ण वर्ग को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह लोधी समाज से आते हैं। वहीं प्रकाश पाल संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विद्यासागर सोनकर पार्टी के पुराने और अनुभवी दलित नेताओं में गिने जाते हैं। वह पूर्व सांसद और पूर्व विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं।
यानी भाजपा की सूची केवल आठ नामों की सूची नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक संतुलन का सियासी संदेश भी मानी जा रही है।
सबसे ज्यादा चर्चा श्रुति गंगवार की
इन आठ नामों में श्रुति गंगवार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। बरेली के लंबे समय से भाजपा के प्रमुख चेहरे रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति को राज्यसभा का टिकट देकर पार्टी ने रूहेलखंड की राजनीति में एक नए चेहरे को आगे बढ़ाया है।
संतोष गंगवार बरेली की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं और कुर्मी समाज के प्रमुख नेताओं में उनकी पहचान रही है। ऐसे में उनकी बेटी को उच्च सदन भेजने का फैसला राजनीतिक रूप से कई संदेश देता है।
इसे एक तरफ कुर्मी समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ पार्टी के पुराने और समर्पित राजनीतिक परिवारों को साथ रखने की रणनीति के रूप में भी।
पिता को राज्यपाल की जिम्मेदारी, अब बेटी की संसद में एंट्री
2024 के लोकसभा चुनाव में संतोष गंगवार को टिकट नहीं मिलने के बाद बरेली की राजनीति में उनके समर्थकों के बीच कई तरह की चर्चाएं थीं। इसके बाद उन्हें राज्यपाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली और अब उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है।
श्रुति गंगवार पेशेवर पृष्ठभूमि से आती हैं और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं श्रुति का राज्यसभा प्रत्याशी बनना उनके औपचारिक राजनीतिक पदार्पण के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी लगातार पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक समीकरण को केंद्र में रखती रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से ओबीसी वर्ग के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को आगे करना अपनी सामाजिक पहुंच को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पुराने चेहरों को झटका, कई दिग्गज सूची से बाहर
भाजपा की सूची की एक बड़ी खासियत यह है कि पार्टी ने इस बार कई पुराने चेहरों को दोबारा मौका नहीं दिया है। राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों और बड़े नेताओं में से कई नाम इस सूची से बाहर हैं।
इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य जैसे नामों की चर्चा प्रमुख है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी उत्तर प्रदेश से जारी इस सूची में नहीं है।
इससे साफ संकेत मिल रहा है कि भाजपा राज्यसभा में भी पीढ़ीगत बदलाव और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
आगरा से राम प्रताप सिंह चौहान को मौका
भाजपा ने आगरा से राम प्रताप सिंह चौहान को भी उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की सूची में उनका शामिल होना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं प्रियंका सिंह रावत को शामिल कर पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व को भी मजबूती दी है। कुल मिलाकर भाजपा की सूची में संगठन, जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और नई पीढ़ी—चारों का मिश्रण दिखाई देता है।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 अक्टूबर को होंगे। इसी दिन पश्चिम बंगाल की एक रिक्त राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव भी कराया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
राज्यसभा चुनाव में मतदान को लेकर निर्वाचन आयोग ने विशेष व्यवस्था भी की है। मतपत्र पर पसंद दर्ज करने के लिए केवल आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया इंटीग्रेटेड वॉयलेट कलर स्केच पेन इस्तेमाल किया जा सकेगा। किसी अन्य पेन से मतदान मान्य नहीं होगा।
अब नजर 2027 पर
भाजपा की इस सूची को सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित करके देखना मुश्किल है। उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक जमीन तैयार हो रही है और ऐसे में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन भी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
खासकर श्रुति गंगवार की एंट्री को रूहेलखंड में भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक पकड़ को बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने अपने संगठन में यह संदेश भी दिया है कि राज्यसभा सिर्फ वरिष्ठ नेताओं के पुनर्वास का मंच नहीं, बल्कि नई राजनीतिक पीढ़ी को आगे बढ़ाने का रास्ता भी है।
यही वजह है कि भाजपा की आठ नामों वाली यह सूची फिलहाल राज्यसभा चुनाव से कहीं ज्यादा उत्तर प्रदेश की आने वाली सियासत की पटकथा के संकेत देती नजर आ रही है।
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