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क्यों गांव में ही रहते थे नाना पाटेकर? KBC में बताई थी मुंबई छोड़ने की वजह

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मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर उनका निधन हो गया। पर्दे पर अपने दमदार अभिनय और जिंदगी में बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर की निजी जिंदगी भी उतनी ही सादगी भरी थी। स्टारडम की चकाचौंध के बीच उन्होंने खुद को हमेशा गांव और मिट्टी से जोड़े रखा।

नाना पाटेकर के कई ठिकाने थे, लेकिन उनका मन शहर की भीड़ और आलीशान जिंदगी में नहीं रमता था। मुंबई में वह अंधेरी के समर्थ नगर, लोखंडवाला इलाके में एक साधारण वन बीएचके फ्लैट में रहते थे। एक बड़े फिल्म स्टार होने के बावजूद उन्होंने अपनी जिंदगी में दिखावे और जरूरत से ज्यादा सुख-सुविधाओं को जगह नहीं दी।

पुणे के पास खडकवासला में उनका करीब 27 एकड़ में फैला फार्महाउस था। यहां वह खेती-बाड़ी से भी जुड़े रहते थे। गोवा के डोना पाउला में भी उनका घर था, जहां गुरुवार को कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हुआ। वहीं महाराष्ट्र के रत्नागिरी में उनका पुश्तैनी गांव था, जिससे उनका भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बना रहा।

KBC में अमिताभ बच्चन के सवाल पर खोला था राज

नाना पाटेकर के गांव से लगाव की असली वजह का एक भावुक किस्सा 8 जून 2025 को सामने आया था। वह क्विज आधारित रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में बतौर मेहमान पहुंचे थे। शो के मेजबान अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा था कि जिंदगी में इतना कुछ हासिल करने के बाद भी उन्होंने गांव की जिंदगी को क्यों चुना?

नाना पाटेकर का जवाब उनकी पूरी जीवनशैली की झलक देता है। उन्होंने कहा था कि वह खुद को फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं मानते, बल्कि फिल्मों में काम करने के लिए आते हैं और काम पूरा होने के बाद वापस लौट जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि वह पार्टियों में जाना या शहर में ज्यादा समय बिताना पसंद नहीं करते।

नाना ने कहा था कि वह गांव के रहने वाले हैं और वहीं की जिंदगी उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। उनके लिए गांव केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुकून और अपनेपन की दुनिया थी।

‘मुझे अपनी मां से जितना चाहिए था, उससे ज्यादा मिला’

केबीसी के उस एपिसोड में नाना पाटेकर ने अपनी जरूरतों और जीवन के प्रति नजरिए के बारे में भी खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि जरूरतों को सीमित रखना आसान है। उन्होंने बताया था कि उनके घर में एसी तक नहीं है, क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं होती।

उन्होंने अपने घर की तुलना शहर की चारदीवारी से अलग करते हुए कहा था कि उनके आसपास पहाड़ हैं और उन्हीं पहाड़ों से घिरा घर उन्हें बेहद सुकून देता है।

नाना पाटेकर ने अपनी मां का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें मां से जितना चाहिए था, उससे कई गुना ज्यादा मिला। उनके शब्दों में एक ऐसे इंसान की झलक थी, जिसने सफलता की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा।

माधुरी दीक्षित की तारीफ में भी खुलकर बोले थे नाना

‘कौन बनेगा करोड़पति 17’ में नाना पाटेकर ने अपने फिल्मी सफर से जुड़े कई किस्से भी साझा किए थे। शो में एक दर्शक ने उनसे फिल्म ‘वजूद’ में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का अनुभव पूछा था।

नाना ने माधुरी दीक्षित की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने उन्हें बेहतरीन अभिनेत्री, खूबसूरत और शानदार डांसर बताते हुए कहा था कि उनमें वह सब कुछ है, जो एक इंसान में होना चाहिए। उन्होंने अभिनेत्री के प्रति अपने गहरे सम्मान की बात भी कही थी।

‘कैसे बताऊं मैं तुम्हें’ कविता से जुड़ी याद भी सुनाई

कार्यक्रम में नाना पाटेकर से फिल्म ‘वजूद’ में माधुरी दीक्षित को सुनाई गई कविता ‘कैसे बताऊं मैं तुम्हें’ के बारे में भी सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने बताया था कि यह कविता जावेद अख्तर ने लिखी थी और उन्हें आज भी पूरी तरह याद है।

नाना ने बताया था कि उन्होंने यह कविता माधुरी दीक्षित को सुनाई थी, इसलिए उससे जुड़ी यादें उनके लिए बेहद खास थीं। उन्होंने कहा था कि आज भी उस कविता से जुड़ी कई यादें उनके मन में ताजा हो जाती हैं।

नाना पाटेकर की जिंदगी का यह पहलू बताता है कि पर्दे पर करोड़ों दिलों पर राज करने वाला यह अभिनेता असल जिंदगी में कितनी सादगी पसंद करता था। मुंबई की फिल्मी दुनिया ने उन्हें नाम, शोहरत और पहचान दी, लेकिन उनका दिल हमेशा गांव की मिट्टी, पहाड़ों और शांत जिंदगी के करीब रहा। शायद यही वजह थी कि जिंदगी के आखिरी दौर तक उनके लिए सुकून का मतलब चमक-दमक नहीं, बल्कि अपनी जड़ों के बीच लौटना था।

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