देवरिया। जिस घर में फौजी पिता की अंतिम विदाई का दुख पसरा हुआ था, उसी चौखट पर जब एक साथ चार-चार शव पहुंचे तो पूरा गांव चीत्कार कर उठा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सुल्तानपुर के पास हुए भीषण एंबुलेंस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां और उम्मीदें एक ही पल में उजाड़ दीं।
गहिला दुधैला गांव निवासी सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह का हाल ही में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन चंडीगढ़ के सैन्य अस्पताल में वे जिंदगी की जंग हार गए। पिता के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव लाने और उनका अंतिम संस्कार करने के लिए उनका इकलौता बेटा गौरव सिंह (18 वर्ष), बड़ा भाई रामसमुझ (55 वर्ष), रिश्ते का भतीजा और वार्ड सभासद राजन सिंह (35 वर्ष) एंबुलेंस से पंचकूला से देवरिया के लिए निकले थे। साथ में चालक जसपाल सिंह एंबुलेंस चला रहा था।
घर पहुंचने से ठीक पहले काल ने घेरा
परिजनों को क्या पता था कि जिस फौजी पिता को आखिरी विदाई देने वे देवरिया आ रहे हैं, काल रास्ते में ही उनका इंतजार कर रहा है। रविवार सुबह सुल्तानपुर के हलियापुर के पास एंबुलेंस भयानक हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी दर्दनाक थी कि फौजी के इकलौते बेटे गौरव, बड़े भाई रामसमुझ, भतीजे राजन और चालक जसपाल की मौके पर ही सांसें थम गईं।
दो एंबुलेंस से पहुंचे चार शव, मची चीख-पुकार
सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे जब दो एंबुलेंस गांव में दाखिल हुईं, तो पूरे इलाके का कलेजा कांप उठा। फौजी सत्यवान सिंह की पत्नी सरोजनी देवी अपने पति, इकलौते जवान बेटे और जेठ का शव एक साथ देखकर बदहवास होकर गिर पड़ीं। 18 साल के इकलौते बेटे गौरव को खोने का गम पूरे गांव के लिए असहनीय हो गया। ग्रामीणों और रिश्तेदारों की आंखें आंसुओं से नम थीं और पूरे गहिला दुधैला गांव में चूल्हा तक नहीं जला।
बथुआ नदी किनारे जलीं चार चिताएं
हजारों गमगीन नम आंखों और “भारत माता की जय” के नारों के बीच रुद्रपुर के बैकुंठ धाम पर चारों शवों का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ चार चिताएं जलती देख हर शख्स का दिल दहल गया। हादसे में उजड़े परिवार की रोती-बिलखती पत्नी सरोजनी देवी ने शासन-प्रशासन से पीड़ित आश्रितों को आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और गांव में अमर शहीद तोरण द्वार बनवाने की गुहार लगाई है।
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