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मथुरा में ऑनलाइन ऐप के जरिए अवैध कमाई करने वाले गिरोह का खुलासा, तीन गिरफ्तार

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लाइव होस्टिंग और वीडियो कॉलिंग ऐप के जरिए चल रहा था कथित अवैध कारोबार, एसटीएफ ने मास्टरमाइंड समेत तीन को दबोचा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग और लाइव होस्टिंग ऐप के माध्यम से कथित अवैध वित्तीय गतिविधियां संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ और मथुरा पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार, 11 अक्टूबर को गिरोह के कथित मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक सीपीयू, तीन चेकबुक, एक पासबुक, एक आधार कार्ड, तीन डेबिट कार्ड, 58 स्क्रीनशॉट और एक फोर्ड कार बरामद की गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा के यमुनापार थाना क्षेत्र के सिहोरा गांव निवासी प्रवीण कुमार, लक्ष्मी नगर निवासी विपिन कुमार और हाईवे थाना क्षेत्र के मालिपाड़ा निवासी अर्जुन दिवाकर के रूप में हुई है। एसटीएफ के मुताबिक, तीनों की उम्र करीब 26 से 27 वर्ष के बीच है। आरोपियों को रविवार सुबह करीब 4:50 बजे हाईवे थाना क्षेत्र के मोतीकुंज स्थित एक कार्यालय से गिरफ्तार किया गया।

फर्जी पहचान बनाकर करते थे कमाई

एसटीएफ के अनुसार, गिरोह के सदस्य लाइव होस्टिंग और वीडियो कॉलिंग ऐप पर दूसरे लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान बनाते थे। इसके बाद युवतियों को लाइव होस्टिंग के काम पर रखा जाता था। गिरोह का कथित मास्टरमाइंड प्रवीण कुमार उन्हें 12 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन देता था। इन गतिविधियों से होने वाली कमाई को बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त किया जाता था।

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ऐप पर मिलने वाले आभासी सिक्कों और उपहारों के जरिए रकम अर्जित करते थे। इसके बाद इस रकम को विभिन्न माध्यमों से बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह के बैंक खातों में विदेशी कंपनी से कमीशन की रकम भी आती थी। इस तरह कथित अवैध कमाई को सामान्य वित्तीय लेनदेन के रूप में दिखाने की कोशिश की जाती थी।

वर्ष 2023 से सक्रिय था गिरोह

पूछताछ में प्रवीण कुमार ने कथित तौर पर बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे इस ऐप के माध्यम से कमाई करने का तरीका बताया। इसके बाद उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर काम शुरू किया। अर्जुन दिवाकर ने भी पूछताछ में बताया कि उसने मथुरा के मोतीकुंज क्षेत्र में कार्यालय किराये पर लेकर युवतियों को काम पर रखा था। गिरोह के सदस्य फर्जी तस्वीरों और नामों से पहचान बनाकर ऐप पर गतिविधियां संचालित करते थे।

एसटीएफ के मुताबिक, इस ऐप पर ऑनलाइन खेलों और वीडियो कॉलिंग के जरिए भी कमाई की जाती थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि गिरोह की गतिविधियां नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ अन्य अवैध आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अन्य सदस्यों की तलाश जारी

एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी, जिससे कथित लेनदेन और अन्य गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा सकें।

इस मामले में मथुरा के हाईवे थाने में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित संबंधित कानूनों की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से संबंधित कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।

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