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‘संक्रान्ति का संहार’ पर संवाद, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘कृति और कृतिकार सम्मान-2026’

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लखनऊ में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय सम्मानित

संजीव सिंह बलिया। बलरामपुर गार्डन, लखनऊ स्थित 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के साहित्यिक मंच पर आयोजित ‘कृति और कृतिकार (दशम संवाद)’ कार्यक्रम में बलिया के प्रख्यात दार्शनिक एवं उपन्यासकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘कृति और कृतिकार सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पहार एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

पंडित बृजमोहन अवस्थी सुस्मृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का केंद्र डॉ. उपाध्याय की चर्चित ऐतिहासिक कृति ‘संक्रान्ति का संहार’ पर हुआ सीधा संवाद रहा। कार्यक्रम में उपन्यास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, कथ्य, वैचारिकता और साहित्यिक विशेषताओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

उपन्यास की विषयवस्तु

‘संक्रान्ति का संहार’ उपन्यास 14 जनवरी, 1761 को लड़े गए पानीपत के तृतीय युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह युद्ध भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की निर्णायक घटनाओं में गिना जाता है, जिसने तत्कालीन राजनीति, सत्ता-संतुलन और सामाजिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया।उपन्यास में युद्ध की पृष्ठभूमि के साथ नेतृत्व, रणनीति, संघर्ष, राष्ट्रीय चेतना और पराजय के दूरगामी प्रभावों को साहित्यिक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। इतिहास को मानवीय संवेदना और व्यापक वैचारिक संदर्भों से जोड़ना इस कृति की विशेषता मानी गई।

संवाद और समीक्षा

कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ उपन्यासकार महेंद्र भीष्म ने किया। उन्होंने स्वयं ‘संक्रान्ति का संहार’ पर मुख्य संवाद प्रस्तुत किया, जबकि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव ने पुस्तक की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि किन्नर गुरु श्रीमती पायल सिंह रहीं। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ उपन्यासकार एवं समीक्षक राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ने की, जबकि संचालन डॉ. सरला शर्मा ने किया।

बधाई एवं शुभकामनाएं

डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस साहित्यिक सम्मान पर डॉ. धर्मदेव यादव, डॉ. इंद्रजीत तिवारी, डॉ. विनोद वर्मा, हरेंद्र नाथ मिश्र, राहुल पाण्डेय, राधेश्याम पाण्डेय, रामदरश यादव ‘क्रांति’, उमाशंकर राम, रामकृष्ण मौर्य और हेमंत प्रजापति,पत्रकार संजीव सिंह सहित अनेक साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने हार्दिक बधाई दी। उनके निरंतर साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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